दो गरीब दोस्तों की प्रेरक कहानी | Moral Stories for Kids in Hindi

 Moral Stories for Kids in Hindi

Moral Stories for Kids in Hindi
दो गरीब दोस्तों की प्रेरक कहानी

एक समय की बात है। एक गांव में दो दोस्त रहा करते थे उनका नाम आशु और वाशु था। वह गरीब थे। आशु और वाशु दोनों इकट्ठे स्कूल में जाया करते थे वो पहली कक्षा से ही साथ थे और बाहरवीं कक्षा तक साथ ही रहे इस कारण उनकी दोस्ती बहुत पक्की हो गयी। 


अब वह बड़े हो चुके थे और अपनी गरीबी को दूर करने के लिए कोई काम करना चाहते थे। कोई काम शुरू करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे इसलिए दोंनो ने एक सलाह बनाई कि हम कुछ पैसे उधार लेकर अपना काम शुरू करेंगे। 


वह किसी भी ऐसे व्यक्ति को नहीं जानते थे जो उन्हें  कर्ज दे सके इसलिए उन्होंने अपने स्कूल के मास्टर जी से पैसे उधार लेने  की सलाह बनाई । 


वह मास्टर जी के पास उधार लेने के लिए उनके घर गए और मास्टर जी से कहने लगे –


मास्टर जी हमें अपना कोई काम शुरू करना है इसलिए हमें कुछ पैसे उधार चाहिए। 


मास्टर जी ने उन्हें एक-एक हजार रूपए दिए और कहा –


बेटा तुम ये पैसे ले लो और अपना काम शुरू करो लेकिन तुमको ये पैसे मुझे 1 साल के बाद लौटाने होंगे। 


आशु और वाशु ने कहा ठीक है मास्टर जी हम आपको ये पैसे 1 साल के बाद जरूर लोटा देंगे। 


आशु और वाशु पैसे लेकर चले गए  रास्ते में जाते हुए वाशु ने कहा-


 चलो हम इन पैसों से मौज मस्ती करते हैं और खाते पिते हैं।  


इसपर आशु ने कहा-


 नहीं हमने यह पैसे कुछ काम शुरू करने के लिए उधार लिए हैं जिससे हमारी गरीबी दूर हो सके। 


वाशु ने आशु की बात नहीं मानी और वहां से चला गया। 


लेकिन आशु ने अपना काम शुरू करने के लिए बहुत मेहनत की और मास्टर के द्वारा दिए गए पैसों से उसने किसानो के पास से सब्जियां खरीदी और बाजार में बेचने चला गया उसे बहुत अच्छा मुनाफा हुआ। वह हर रोज किसानो से सब्जियां लेता और उन्हें बाजार में बहुत मेहनत करके बेचता। 



धीरे धीरे उसने शहर में एक दुकान ले ली और दुकान में सब्जियां बेचने लगा। अब आशु बहुत बड़ा आदमी बन चूका था। 


वाशु ने उन पैसों को मौज मस्ती करने में खर्च दिया जिसके कारण वाशु अब भी गरीब है। 


लेकिन जब उन्हें मास्टर जी के द्वारा बोली गयी बात याद आयी तो दोनों मास्टर जी के घर पहुंचे जब मास्टर ने आशु से पूछा- 


तुम मेरे पैसे लाये हो? 


तो आशु ने मास्टर जी का धन्यवाद करते हुए उन्हें एक  हजार की जगह दो हजार रूपए दिए और कहा –


मास्टर जी आपसे लिए गए पैसों से मैंने  सब्जी बेचने का  काम किया जिससे आज मैं बहुत अमीर हो गया हूँ। 


लेकिन जब वाशु से मास्टर  जी ने पूछा कि क्या तुम मेरे पैसे लेकर नहीं आये तो वाशु ने जवाब दिया मास्टर जी मैंने वह पैसे खाने पिने के लिए खर्च दिए थे जिससे मैं गरीब का गरीब रह गया उन पैसों से मैंने सिर्फ एक दिन ही  मौज की लेकिन अगर मैं उनको काम करने के लिए प्रयोग करता तो मैं भी आज आमिर होता। 


अब वाशु बहुत पछताया। 


शिक्षा 


इस कहानी से यह बिलकुल स्पष्ट हो जाता है कि हमें मेहनत करनी चाहिए। जो व्यक्ति मेहनत करता है उसे उसका फल देर से ही सही पर मिलता जरूर है। दूसरी ओर यह कहानी हमें यह शिक्षा भी देती है कि अगर हमारे पास धन है तो उसे फिजूलखर्जी में बर्बाद नहीं करना चाहिए उसे सही जगह लगाना बहुत फायदा दे सकता है। 

अगर आप धन को बे फिजूल में खर्च करते हैं तो सिर्फ कुछ समय तक ही मौज हो पाती है वहीँ अगर आप  उसे सही जगह लगते हो तो जिंदगी भर की मौज मिलती है। 


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