दो घड़ों की प्यारी सी कहानी | stories for kids in Hindi

 stories for kids in Hindi 

दो घड़ों की प्यारी सी कहानी (बच्चों की मजेदार कहानियां)

एक बार एक किसान था वह एक छोटे से गांव में रहता था। उसका नाम रमेश था वह बहुत मेहनत करके फसल उगाया करते था और पैसे कमाता था। रमेश के पास दो घड़े थे जिसमे से एक घड़े में छेद था।

 वह किसान पिने के लिए पानी बहुत दूर बह रही नदी से लाया करता था। वह दोनों घड़ों में पानी भरता था और घर लाता था लेकिन नदी से घर तक के सफर में छेद वाले घड़े में पानी आधे से भी कम रह जाता था।

 जब किसान घर में घड़े रखकर चला जाता था तब बिना छेद वाला घड़ा कहता था
“हा हा हा….. तुम मालिक की मेहनत को बर्बाद कर रहे हो तुम तो घर तक आधे से भी कम पानी लाते हो और मैं मालिक की मेहनत को सफल करता हूँ”

यह बात सुनकर छेद वाला घड़ा बहुत दुखी होता है। 

 रमेश का बिना छेद वाला घड़ा छेद वाले घड़े को हमेशा चिढ़ाता रहता था। 
इसकारण एक दिन छेद वाले घड़े ने बहुत दुखी होकर यह बात अपने मालिक रमेश से कह दी।

इसपर रमेश ने छेद वाले घड़े से कहा-

 “तुम परेशांन न हो जब मैं तुम्हारे अंदर पानी भरकर लाता हूँ तब रास्ते में तुम्हारे छेद से खेतों के किनारे लगाए गए फूलों में पानी आ जाता है। जिससे फूल बहुत अच्छे खिलते हैं और मैं इन्हे शहर में बेचता हूँ और बहुत अच्छे पैसे कमाता हूँ” 

यह सुनकर छेद वाले घड़े को बहुत ख़ुशी हुई और बिना छेद वाले घड़े को बुरा लगा।  


(कहानी की शिक्षा) 


इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी भी व्यक्ति के हुनर का कभी भी मजाक नहीं बनाना चाहिए बल्कि उस व्यक्ति से हमें अपने जीवन में सीख लेनी चाहिए। 

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