[भारत के] सबसे सफल इंट्रेप्रेन्यूअर्स की कहानियां | Success Stories Of Indian Entrepreneurs in Hindi

 

 1. रमेश बाबू (Success Stories Of Indian Entrepreneurs In Hindi)

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आज आपको ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं जिसको पढ़ने के बाद शायद आप भी अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा कर पाओ और सक्सेस हासिल कर सको। ये कहानी रमेश बाबू नाम के एक इंसान की है जो पेशे से नाई हैं और इनके पिता जी भी नाइ का काम करते थे।  तो आईये जानते है इनकी सक्सेस स्टोरी के बारे में। 
 
रमेश बाबू बैंगलोर में एक ऐसे परिवार में जन्मे थे जो गरीब था और उनके पिता जी नाई की एक दुकान चलते थे। पिता जी की मृत्यु के बाद दुकान इतनी अच्छी नहीं चलती थी और इनकी माँ लोगो के घरों में जाकर बर्तन मांज कर कुछ पैसे कमाकर घर चलाती थी और रमेश बाबू की पढाई का खर्च चल रहा था।
 
 एक समय ऐसा आया कि रमेश ने अपने पिता जी की दुकान अपने चाचा जी को पांच रूपए पर दिन किराए पर दे दी।  लेकिन दुकान से अच्छी कमाई न होने के कारण उनके चाचा ने किराया देने से इंकार कर दिया। यह समय रमेश बाबू के लिए बहुत ज्यादा मुसीबत वाला था हाल यह था कि रमेश को दिन में सिर्फ एक समय ही खाना खाने के लिए मिलता था। 
 
रमेश बाबू ने अपनी पढ़ाई के साथ अपनी माँ के साथ काम करने का निश्चय किया। इसी कारण उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के साथ साथ मैकेनिक का काम भी सीखा। बहुत मेहनत के बाद उन्होंने अपने पिता जी की नाई की दुकान वापिस ली और उसे अच्छे से दोबारा बनवाया।
 
 परिणामस्वरूप दुकान बहुत अच्छी  चलने लगी और अच्छी कमाई होने लगी। देखते ही देखते उनका काम इतना अच्छा चलने लग गया कि वह सुबह 8 बजे दुकान पर आते और रात के 12 बजे तक काम करते थे। कई बार ज्यादा काम के चलते उन्हें वही रहना पड़ता था। 
 
1993 में रमेश बाबू ने अपनी कमाई और लोन से एक मारुती ओमनी कार खरीदी।लोन लेने के बाद कुछ समय तक तो उन्होंने किश्ते आसानी से भर दी पर एक समय ऐसा आया कि वह किश्तें नहीं हर पाए। इसी बात की टेंशन में उनकी माँ  जिनके घर वह काम करती थी उसका नाम नंदिनी था उनके पास अपनी तकलीफ बताने लगी।  नंदिनी ने उन्हें बड़ा ही अच्छा तरीका बताया। 
 
जिनके घर वह काम करती थी वह उसे बड़ी बहन की तरह समझते थे। उसका नाम नंदिनी था उनके पास अपनी तकलीफ बताने लगी।  
 
नंदिनी ने उन्हें बड़ा ही अच्छा तरीका बताया कि  क्यों न आप इस कार को रैंट पर देना शुरू कर दो क्योंकि नंदिनी उनकी बड़ी बहन की तरह थी उन्होंने उनकी बात तुरंत मान ली और कार रैंट पर देने लगे उन्होंने अपनी कार सबसे पहले इंटर कम्पनी को रैंट पर दी जो नंदिनी की कंपनी थी। 
 
उस समय रमेश खुद कार चलते थे। उनका यह काम भी बहुत अच्छा चलने लगा। 2004 में उन्होंने 5-6 करें खरीदी। लेकिन अब भी उनका पूरा ध्यान अपने पुश्तैनी काम में ही था। रमेश ने देखा कि कार रैंट का काम अच्छे से नहीं चल रहा था। इस कारण उन्होंने रिसर्च की और पाया कि इस काम में बहुत कोम्पीटिशन है।
 
 उन्होंने कुछ नया करने के बारे में सोचा। उन्होंने एक लक्ज़री कार लेने का मन बनाया जिस लक्ज़री कार को रमेश खरीदना चाहते थे उसकी कीमत 40 लाख रूपए थी लोगो ने रमेश को बहुत बार टोका और “कहा तुम यह गलत कर रहे हो तुम्हारे पैसे डूब जायेंगे” लोगो ने उन्हें बहुत बार यह कहा लेकिन रमेश बाबू रुकने वालों में से नहीं थे।
 
रमेश बाबू ने कहा अगर पैसे डूब गए तो मै कार बेच दूंगा। परिणामस्वरूप रमेश ने यह रिस्क लिया और लक्ज़री कार पर इन्वेस्ट करने वाले बैंगलुरु में पहले व्यक्ति बने। 
 
कार लेने के बाद उनका काम बहुत अच्छा चलने लगा और जब भी किसी को लक्ज़री कार रैंट पर लेनी होती तो उन्ही का नाम जहन में आता। एक दिन ऐसा आया कि 2011 में इन्होने 3.5 करोड़ की रोल्स रॉयस  खरीदी और इंडिया में अपनी एक नई पहचान बनाई। 
 

 

इनका बिज़नेस इतना चला कि इनके पास अब 400+ कारें हैं। जिनमे से 120 लक्ज़री कारें हैं और 200+ ड्राइवर हैं। अब रमेश बाबू का नाम करोड़पतियों में गिना जाता है। लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि करोड़पति होने के बाद भी वह अपनी उसी दुकान में नाई का काम करते हुए देखे जा सकते हैं। 
 

 

 आप सोच रहे होंगे कि बाल काटने के वह बहुत पैसे लेते होंगे लेकिन ऐसा नहीं है मात्र 100-150 रूपए में आप उनकी दुकान में बाल कटवा सकते हैं। 
रमेश बाबू कहते हैं कि मैं जिस अवस्था से आया हूँ उसे भूल नहीं सकता।
 
 
 रमेश बाबू की कस्टमर लिस्ट में स्टार और बड़ी-बड़ी हस्तियां शामिल हैं जैसे अमिताभ बचन, शारुख खान, ऐश्वर्या राय जैसी हस्तियां शामिल हैं। 
वह अपनी रोल्स रॉयल कार को 50 से 60 हजार रूपए पर डे के हिसाब से रैंट पर देते हैं 
 
वह इस धारणा पर यकीन रखते हैं कि “अगर सीखना बंद तो जीतना बंद” इसलिए वह अपने पुश्तैनी काम को जारी रखने के लिए और लेडिस कटिंग सिखने के लिए सिंगापुर भी जा चुके हैं। 
 
और वो इस बात पर भी यकीन करते हैं कि मेहनत की पहली चीज अलग ही होती है इस कारण पहली गाड़ी जो उन्होंने लोन से खरीदी थी मारुती ओमनी आज भी उनकी पार्किंग में देखी जा सकती है। 
 
जो धारणा शायद आपके अंदर है कि सिर्फ पैसे वाले व्यक्ति ही सफल हो सकते है ये धारणा भी गलत सिद्ध हो जाएगी और जानोगे कि सफल होने के लिए पैसों से ज्यादा हौसलों की जरुरत होती है। 
 
आपके अंदर यह धारणा भी होगी कि सफल होने के लिए बहुत पढाई लिखाई की जरुरत होती है यह भी गलत सिद्ध हो जाएगी। हाँ कुछ जगह सफलता पाने के लिए बहुत अधिक पढ़ना पड़ता है।
 

2. रेणुका आराध्य (Success Stories Of Entrepreneurs In India)

  यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति पर आधारित है जो बचपन में घर घर जाकर भीख मांगकर अपना गुजरा करता था  और आज 50 करोड़ की कम्पनी  का मालिक है जिसकी कम्पनी के कारण हजारों लोगों को रोजगार मिलता है उस व्यक्ति का नाम है रेणुका आराध्य। 
 
रेणुका आराध्य बंगलुरु के नजदीक गोपसानद्र गाँव से तालूक रखते हैं। आईये जानते हैं इनकी घनघोर गरीबी से 50 करोड़ की कपनी तक की कहानी। 
 
रेणुका जी के पिता जी राज्य सरकार के द्वारा एक मंदिर के पुजारी बनाये गए थे। परन्तु उनको कोई भी वित्तीय सहायता सरकार की तरफ से नहीं मिलती थी। 
 
मंदिर की पूजा के बाद वो और उनके पिता जी गांव में घर घर जाकर आटा चावल गेहूँ और दाल माँगा करते थे। वो इसे बाजार जाकर बेच कर आते और सिर्फ इतने ही पैसे मिलते की वो बड़ी मुश्किल से अपने घर का गुजरा कर सकें।
 
एक समय ऐसा आया कि जब रेणुका जी कक्षा 6 की पढ़ाई कर रहे थे तब उनके पिता जी ने उन्हें घरों में नौकर के काम पर लगा दिया। वे लोगो के घरों में साफ-सफाई और बर्तन आदि धोने का काम करते थे। 
 
कुछ समय के बाद उस काम में पैसे काम होने के कारण उन्होंने वह काम झोड़ा और दूसरे घर में एक बुजुर्ग के घर उनकी देखभाल में लग गए जो एक चरम रोगी थे और उन्हें पैसे भी अच्छे देते थे।
 
  वह वहां उनकी देखभाल करते नहलाते-धुलाते और उनके शरीर पर मरहम लगते थे। उनको वहां काम करते हुये कुछ समय ही हुआ था कि उनके पिता चल बेस।  
 
इस कारण सारी जिम्मेदारियां उन के ऊपर आ गई पढ़ाई-लिखाई में वे ज्यादा ध्यान नहीं लगा पाते थे जिस कारण वो 10वी में फ़ैल हो गए जिम्मेदारियों के ज्यादा बढ़ जाने के कारण उन्होंने पढ़ाई जोड़ने पड़ी।
 
 पैसे कमाने के लिए उन्होंने स्लीपर की नौकरी भी की और मजदूरी तो वह करते ही रहते थे। एक समय ऐसा आया कि वह बुरी संगत में बुरी तरह फंस गए। 
 
शराब और जुआ खेलना उनकी आदत बन गई। उनके दृढ़ निश्चय के कारण उन्होंने यह सब छोड़ दिया और शादी करने के बारे में सोची।  
 
परिणामस्वरूप 20 साल की उम्र में उन्होंने शादी कर ली। घर की स्थिति अच्छी न होने के कारण उनकी पत्नी को भी किसी कम्पनी में मजदूरी का काम करना पड़ा।
 
 उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत मुश्किल काम किये कई कम्पनियो में तो उन्होंने मजदूरी का काम करना पड़ा था। जैसे 600 रूपए के लिए उन्होंने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की और 15 रूपए प्रति नारियल के पेड़ पर वह चढ़कर नारियल तोड़ते थे। 
 
उन्होंने बचपन से कुछ बड़ा कर गुजरने की ठान ली थी इसी कारण उन्होंने अपना काम करने की सोची।  इस कारण उन्होंने अपनी मेहनत से 30 हजार रूपए इकट्ठे किये और बैग, फ्रिज और सूटकेस के कवर बाजार में जाकर बेचने लगे।
 
 इस काम में उनकी पत्नी उनकी सहायता करती थी वो घर में सिलाई का काम करती और वो घर घर जाकर उन्हें बेचते पर कुछ समय काम करने के बाद बदकिस्मती से उनका यह काम नहीं चला और पैसे डूब गए। 
 
 पर यहाँ रेणुका जी नहीं रुके वो कहते हैं न कि  जब तक इंसान असफल नहीं होता वह सफल नहीं हो सकता और हारता वो है जो प्रयास करना छोड़ दे प्रयास करने वाला एक न एक सफल हो ही जाता है इसलिए कभी भी प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिए।
 
इसी धारणा के साथ आगे बढ़ते हुए उन्होंने ड्राइवर बनने का फैसला किया उन्होंने ड्राइवरी तो सिख ली पर लाइसेंस लेने के लिए  उनके पास पैसे नहीं थे इसलिए उन्होंने अपनी शादी की अंगूठी बेच कर लाइसेंस प्राप्त किया।
 
 इसके बाद सौभाग्यवश उन्हें ड्राइवर की  जॉब मिल गई।  कुछ समय अच्छा बीतने के बाद दुर्भाग्यवश उनसे एक दुर्घटना हो गई जिसके कारण उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
 
 यहाँ भी सफलता न मिलने के कारण उन्होंने हॉस्पिटल में काम करना शुरू कर दिया जहाँ उन्हें शवों के ट्रांसपोर्ट का काम मिला यह काम उन्होंने 4 साल तक किया। 
 
उन्हें वहां अच्छी तनख्वा नहीं मिलती थी इस कारण उन्होंने वह काम भी छोड़ दिया और दूसरी कम्पनी में काम करने की सोची और रेणुका ने दूसरी कम्पनी में काम शुरू करना शुरू कर दिया यहाँ उन्हें विदेशी पर्यटकों को घुमाना होता था।
 
विदेशी पर्यटकों से इन्हे बहुत अच्छे पैसे मिलने लगे इन्होने वह पैसे जमा करने शुरू कर दिए। इन्ही पैसों की सहायता से इन्होने  2001 में पुरानी इंडिका कार खरीदी। उस गाड़ी की कमाई से उन्होंने डेढ़ साल के अंदर ही दूसरी कर भी खरीद ली।
 
उनका काम इतना अच्छा चला कि 2006 तक उन्होंने 5 गाड़ियाँ खरीद ली और सिटी सफारी नाम की एक कम्पनी शुरू की। आखिर बड़ा करने की चाह उन्हें यहाँ कहाँ रुकने देती। 
 
उनको जानकारी मिली कि इंडियन सिटी टैक्सी नामक कंपनी बिकने वाली है। उन्होंने वह कपनी खरीदने की ठान ली और अपनी आधी से ज्यादा कारें बेचने के बाद उन्होंने साढ़े 6 लाख रूपए में जोखिम उढ़ा कर वो कम्पनी खरीद ली।
 
कम्पनी खरीदने के बाद उन्होंने इसका नाम प्रवासी कैपस प्राइवेट लिमिटेड रखा। यह सौदा उन्हें मुनाफे का सौदा साबित हुआ। उनकी कम्पनी  आज 50 करोड़ की है।
 
 साल 2018 तक उन्होंने अपनी कम्पनी को चनई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों  पहुंचाया। यहाँ उनकी लगभग 1300 कैपस चलती हैं। 
 
तो देखा अपने कैसे एक घर घर भीख मांगने वाला बच्चा आज 50 करोड़ की कम्पनी का मालिक है। अगर आपके हौसले बुलंद है तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।
 
आपको कोशिश करना कभी  छोड़ना चाहिए क्योंकि जो कोशिश करना छोड़ देते हैं वो वहीं पर हार जाते हैं  लेकिन जो कोशिश करना बंद नहीं करते उनके जितने की उम्मीद रहती है। 

 

 

 

3. धीरूभाई (Successful Entrepreneurs in India)

Dhirubhai Ambani success story in Hindi
Dhirubhai Ambani
जरूरी नहीं कि एक पढ़ा लिखा इंसान ही हमेशा सफल होता है और पैसे कमा सकता है अर्थात पैसे से पढाई का कोई संबंध नहीं है पढ़ाई सिर्फ अपने आप को एक जानकार और समझदार इंसान बनाने का जरिया है यही मानना था धीरूभाई का। 
 
शायद इसी कारण उन्होंने स्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और पकौड़े बेचने शुरू कर दिए थे। धीरूभाई उन महान व्यक्तियों में से एक हैं जो अपनी एक अलग सोच के साथ जीते  हैं और उसी सोच के साथ ही आज इतने सफल हैं। 
 
धीरूभाई गुजरात के एक छोटे से गांव चोरवाड़ के रहने वाले थे। ये वही व्यक्ति है जिन्होंने रिलायंस की नीव रखी थी तो आप सोच सकते हैं कि इनका करोड़ों का कारोबार होगा। 
 
धीरूभाई मानते थे कि हमेशा बड़ा सोचो क्योंकि विचारों पर किसी का हक़ नहीं है। इसी विचार के साथ वे एक साधारण परिवार से दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं।
 
 शायद आप इनका पूरा नाम नहीं जानते होंगे इनका पूरा नाम धीरजलाल गोवर्धनदास अम्बानी है। 
 
अगर आप इनकी सक्सेस स्टोरी के बारे में जानेगे तो आप जरूर मोटीवेट होंगे और अगर आप भी  इनके विचारों को अपने जीवन में अपनाते हैं तो जरूर सफल होंगे। तो आईये जानते हैं इनकी सक्सेस स्टोरी के बारे में।
 
जैसा कि आपको ऊपर बताया गया है कि धीरूभाई ने अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई के बाद स्कूल छोड़ दिया था और पकोड़े बेचने शुरू कर दिए थे वह घूम घूम कर पकोड़े बेचते और आमदनी कमाते पर वह उस आमदनी से खुश नहीं थे। 
 
पकौड़े बेचते हुए उन्हें कईं साल बीत गए और जब वे 16 वर्ष के हुए तो अपने भाई के साथ जिसका नाम रमडिक लाल था की सहायता से अपने एक दोस्त के साथ यमन देश में काम करने गए थे। 
 
जब उन्होंने वहाँ काम ढूंढ़ना शुरू किया तो उन्हें वहाँ पेट्रोल पम्प पर नौकरी मिल गई।
 
 वे वहां बहुत ही निष्ठा और प्रेम से काम करते थे इसी को देखते हुए उन्हें उसी पैट्रोल पंप में कलर्क की पोस्ट पर मात्र 300 रूपए के लिए काम करने को कहा और वे काम करने लग गए । 
 
धीरूभाई ऐसे व्यक्ति थे कि दिन भर काम करने के बाद भी पार्ट टाइम में कोई न कोई काम जरूर करते थे इसलिए उनके पास अच्छे पैसे बचे रहते थे।
 
वे हमेशा बड़ा और आमिर बनाने की चाह रखते थे। हमेशा आमिर बनने के नए नए तरीके सोचते रहते थे शायद इसी सोच के कारण वे यमन देश गए थे। लेकिन वहां की आमदनी में भी वे संतुष्ट नहीं थे। 
 
एक दिन उनके दिमाग में एक ख्याल आया कि अगर बड़ा आदमी बनाना है तो अपना काम शुरू करना होगा। लेकिन परेशानी यह थी कि अगर बिज़नेस करना है तो पैसे भी अच्छे खासे होने चाहिए। 
 
जैसा कि उनके काम से खुश होकर उनकी पेट्रोल पम्प कम्पनी ने उन्हें एक वर्कर से कलर्क का पद दिया इसी तरह कम्पनी ने उन्हें कलर्क के काम से खुश होकर उन्हें मैनेजर के पद पर प्रोमोशन कर दिया।
 
 लेकिन उनकी अमीर और बड़ा बनाने की चाह में उन्होंने वह काम कुछ दिन करने के बाद छोड़ दिया। 
 
इसके बाद वे अपने देश यानि भारत वापस आ गए। शायद उनके भारत आने का कारण उनका खुद का बिज़नेस करना था। बिज़नेस शुरू करने के लिए उन्होंने 1955 में एक काम शुरू किया जिसमे उन्होंने 15 हजार रूपए इन्वेस्ट किये। 
 
इस इन्वेस्टमेंट से उन्होंने मसालों के निर्यात और पोलिस्टर के धागे के आयात का काम शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई और उनकी सालाना कमाई 10 लाख रुपये हो गई।
 
 पोलिस्टर के बने कपड़ों को लोगों द्वारा सूती कपड़ों के मुकाबले ज्यादा पसंद किया जाने लगा। 
 
क्योंकि इस कपड़े की खासियत ये थी कि यह टिकाऊ मजबूत और सबसे खास यह सस्ते होते थे और बहुत अधिक समय तक प्रयोग करने के बाद भी इनमे नई जैसी चमक बनी रहती थी। 
 
इसी कारण से उनका मुनाफा कुछ ही समय में कई गुना बढ़ गया। उन्होंने यह काम अपने चचेरे भाई के साथ शुरू किया था और किसी कारणवश उनकी साझेदारी समाप्त हो गई। 
 
इनकी साझेदारी समाप्त होने का कारण यह था कि दोनों का स्वभाव और व्यपार करने के तरीके अलग-अलग थे। पर धीरूभाई ने इस व्यापर के बाद कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और न ही किसी काम में अपनी हार मानी। 
 
आगे बढ़ते हुए धीरूभाई ने टेलीकॉम, एनर्जी, इलेक्ट्रिसिटी और पेट्रोलियम के व्यापार किये और सफलता प्राप्त करते चले गए। 
 
धीरूभाई न केवल खुद करोड़पति बने बल्कि करीब 1 लाख लोगों को रोजगार दे रहें हैं आप उनकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं।  भारत में उनकी कंपनी टॉप पर है। 
 
तो देखा अपने कि किस तरह धीरूभाई ने 15 हजार से शुरू किये गए व्यापार को करोड़ों का कारोबार बना दिया। 
 
अगर आपको सच में सफलता पाने की चाह है और आप उसे पाने के लिए तन और मन दोनों से जुट जाते हैं तो आपको सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता।
 
 सफलता पाने के लिए एक वचन है ये वचन स्वामी विवेकानन्द जी ने एक कहानी में कहा है कि —
 
“जिस कार्य में आप सफलता पाना चाहते हैं उस कार्य में आपको अपने तन मन से ध्यान लगाने की आवश्यकता होती है अगर अपने ऐसा कर लेते हैं तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता”। 
 
यदि आप उस कहानी को पढ़ना चाहते हैं तो यहाँ से पढ़ सकते हैं।
 
 
कुछ लोगों के दिमाग में यह गलत धारणा बनी रहती है कि हम गरीब हैं हम अपना कार्य कैसे शुरू करें। इसके लिए यह जरूर जान लें कि जितने भी दुनिया के आमिर और सफल व्यक्ति हैं 
 
 वे सभी गरीब परिवारों से सम्बन्ध रखते हैं और उन्होंने अपने दम  पर ही अपना कारोबार शुरू किया है। 
 
इसके साथ ही सभी सफल लोग दुनिया से अलग सोच रखते हैं शायद उसी सोच के कारण वह आज इतने सफल हैं।
 

निष्कर्ष (A Case Study Of Successful Entrepreneurs in India)

 
इन कहानियों से यह निष्कर्ष निकलता है कि चाहे कोई भी इंटर्रेन्योरशिप हो उसे बहुत सारा धन या उसका कारोबार उसे पुश्तैनी तौर पर नहीं मिलता। India के हर एक सफल entrepreneurs व्यक्ति ने 0 से ही शुरुआत की है। 
 
बस फर्क सिर्फ इतना ही है कि वो अपने लक्ष्य को पाने के लिए मजबूती से अपने हालतों से लडे वो तो इतने गरीब थे कि भीख भी मांगनी पड़ी। पर इन्होंने हजार बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी। 
 
ऐसे ही एक इंसान की कहानी आप पढ़ सकते हैं जिनको 1009 बार असफलता का सामना करना पड़ा लेकिन अपने जीवन के आखिरी समय में उन्होंने ऐसी सफलता हासिल की। 
 
कि पूरी दुनिया में आज उनका नाम है।  लेकिन शायद आपके हालत इनसे ठीक ही होंगे इसलिए आप भी एक सफल bussiness man बन सकते हैं। बस आपको अपने लक्ष्य के लिए अपने निश्चय को पक्का करने की जरुरत है और हर जाने पर भी टूटना नही है। क्योंकि असफल वो नहीं होता जो कोशिश करने के बाद असफल होता। 
 
असफल वो होता है जो असफल होने के बाद कोशिश करना बंद कर देता। अगर आपको लेख पसंद आया हो तो आप हमारे फसबूक पेज को भी लाइक कर सकते हैं जिसमे इसी प्रकार के लेख आपको मिलते रहेंगे। कॉमेंट करके अपनी सलाह भी जरूर दें ।
 

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