“अपनी ये बातें कभी भी दूसरों को नहीं बतानी चाहिए।”

- चाणक्य

“जब भी धन की हानि हो या किसी भी व्यक्ति का धन नष्ट हो गया हो, ऐसी स्थिति में यह बात किसी को नहीं बतानी चाहिए। ”

- चाणक्य

“मानसिक दुःख होने पर यानि किसी भी प्रकार की चिंता या सोच आपको परेशान कर रही है तो यह भी आपको किसी को नहीं बताना चाहिए।  ”

- चाणक्य

“अगर घर में कोई वाद-विवाद हुआ हो या किसी भी  प्रकार का दोष हो, तो यह भी किसी के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए।”

- चाणक्य

“अगर कोई व्यक्ति आपको धोखा देता है, या ठग लेता है तो यह बात किसी के सामने प्रकट न करें। ”

- चाणक्य

“अपमान होने पर भी आपको यह बात किसी ओर के सामने प्रकट नहीं करनी चाहिए। ”

- चाणक्य

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