“चाणक्य के अनुसार हमें कब सब कुछ छोड़ कर भाग जाना चाहिए”

- चाणक्य

“प्राकृतिक विपत्तियां जैसे अधिक वर्षा होने , बाढ़ आने, सूखा पड़ने पर भागना उचित होता है। ”

- चाणक्य

“दंगे-फसाद, युद्ध आदि होने पर भाग जाना चाहिए क्योंकि इन सब में बहुत बड़ी हानि का सामना करना पड़ सकता है। ”

- चाणक्य

“महामारी के रोग फैलने पर दूसरी जगह भागना ही समझदारी होती है क्योंकि महामारी बड़ी से बड़ी जनसंख्या को खत्म कर देती है।  ”

- चाणक्य

“किसी भी शत्रु के आक्रमण करने पर भी भागना उचित है। ”

- चाणक्य

“भयंकर अकाल पड़ने अर्थात जहाँ खाने पिने की वस्तुएं न मिले,अच्छा रहन सहन न मिले ऐसे में वहां से भाग जाना चाहिए।”

- चाणक्य

“नीच लोगों के साथ होने अर्थात दुष्ट लोगों के साथ से जो व्यक्ति सब कुछ छोड़ का भाग जाता है वह बहुत बड़ी हानि से बच जाता है। ”

- चाणक्य

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