- चाणक्य

“धर्म का आचरण”

- चाणक्य

“धन पैदा करना”

- चाणक्य

“गुरु के वचनों का पालन”

- चाणक्य

“अनेक प्रकार की औषधियों का संग्रह”

- चाणक्य

“विधिपूर्वक और यत्न से करना चाहिए।”

- चाणक्य

“मनुष्य को चाहिए कि धन, धर्म, अन्न, गुरु की कही हुई बातें”

- चाणक्य

“और अनेक प्रकार की उपयोगी औषधियां का संग्रह करता रहे।”

- चाणक्य

“जो मनुष्य ऐसा नहीं करता, उसे जीवन में तरहतरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।”

सम्पूर्ण चाणक्य निति पढ़ने के लिए क्लिक करें