50+ suvichar in hindi for students and school.

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suvichar in hindi for students

जैसे मोरों में शिखा और नागो में मणि का स्थान सबसे ऊपर है, वैसे ही सभी वेदांग और शास्त्रों में गणित का स्थान सबसे ऊपर है।


साहित्य समाज का दर्पण होता है।


हीन लोगों की संगति से बुद्धि हीन हो जाती है, समान लोगों की संगति से समान बनी रहती है और विशिष्ट लोगों की संगति से विशिष्ट ही जाती है।


मानसिक शक्ति  का सबसे बड़ा स्त्रोत है – दूसरों के साथ सकारात्मक तरीकों से विचारों का आदान-प्रदान करना।


उठो, जागो और श्रेष्ठ जनों को प्राप्त कर स्वयं को बुद्धिमान बनाओ।


गलती करने का मतलब है कि आप तेजी से सीखरहें हैं।  बहुत सी तथा बड़ी गलतियां किये बिना कोई बड़ा आदमी नहीं बनता।


बिना अभ्यास के विद्या कठिन है या बिना अभ्यास के विद्या विष के समान है।


असफलता यह बताती है कि सफलता की कोशिश पुरे मन से नहीं की गयी।


असफलता आपको महान कार्यों के लिये तैयार करने की प्रकृति की योजना है


क्षण क्षण  का उपयोग करके विद्या और कण कण का उपयोग करके धन को इकठ्ठा करना चहिये।


जो प्रश्न पूछता है वह पांच मिनट के लिए मूर्ख बनता है लेकिन जो नहीं पूछता वह जीवन भर मुर्ख बना रहता है।


शंका नहीं बल्कि आश्चर्य ही सारे ज्ञान का मूल है।


ज्ञान का विकास और प्रचार ही स्वतंत्रता का सच्चा रक्षक है।


पढ़ना व्यक्ति को सम्पूर्ण बनाता है, वार्तलाप करना उसे तैयार बनता है, लेकिन लेखन उसे एक अति शुद्ध आदमी बनाता है।


जब कुछ संदेह हो, लिख लो


कलम और कागज की सहायता आप से अशांत वातावरण में भी ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।


विद्या धन सभी धनों में सर्वश्रेष्ठ है।


जिसके पास बुद्धि है, बल भी उसी के पास है।


राजा सिर्फ अपने देश में पूजा जाता है, लेकिन विद्वान् की हर जगह पूजा होती है।


विद्यार्थी के पांच लक्षण होते हैं: कौवे जैसी दृष्टि, बगुले जैसा ध्यान, कुत्ते जैसी नींद, अल्पहारी और गृहत्यागी।


बिना अभ्यास के विद्या बहुत कठिन काम है।


प्रत्येक व्यक्ति के लिए उसके विचार ही सारे तालों की चाबी है।


suvichar in hindi for school.

विद्या के समान कोई आंख नहीं है।


खाली दिमाग को खुला दिमाग बना देना ही शिक्षा का उदेश्य है।


कोई भी चीज जो सोचने की शक्ति को बढ़ती है, शिक्षा है।


दिमाग पैराशूट के समान है, जब खुले हों तभी काम करते हैं।


शिक्षा प्राप्त करने के तीन आधार हैं – अधिक निरीक्षण करना, अधिक अनुभव करना और अधिक अध्ययन करना।


शिक्षा, राष्ट्र की सस्ती सुरक्षा है।


अपनी अज्ञानता का अहसास होना ज्ञान की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।


ज्ञान एक खजाना है, लेकिन अभ्यास इसकी चाबी।


जिस प्रकार रात्रि का अंधकार केवल सूर्य दूर कर सकता है, उसी प्रकार मनुष्य की विपत्ति को केवल ज्ञान दूर कर सकता है।


सबसे अधिक ज्ञानी वही है जो अपनी कमियों को  समझकर उनका सुधार कर सकता हो।


क्रोध ऐसी आंधी है जो विवेक को नष्ट कर देती है।


मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अज्ञान ही है।


कष्ट और विपत्ति मनुष्य को शिक्षा देने वाले सबसे बड़े गुण हैं। जो सहस के साथ उनका सामना करते हैं वही विजय होते हैं।


जैसे जल द्वारा अग्नि को शांत किया जाता है वैसे ही ज्ञान द्वारा मन को शांत रखना चाहिए।


बाधाएँ व्यक्ति की परीक्षाएं होती हैं। उनसे उत्साह बढ़ना चाहिए, मंद नहीं पड़ना चाहिए।


किताबों को नहीं पढ़ना किताबों के जलाने से बढ़कर एक अपराध है।


पुस्तक प्रेमी सबसे धनवान और सुखी होता है।


यदि किसी असाधारण प्रतिभा वाले किसी व्यक्ति से हमारा सामना हो तो हमे उससे पूछना चाहिए कि वो कौन सी पुस्तकें पढ़ता है।


किताबें ऐसी शिक्षक हैं जो बिना कष्ट दिए, बिना आलोचना किये और बिना परीक्षा लिए हमे शिक्षा देती हैं।


अध्ययन हमे आनन्द प्रदान करता ही है, अलंकृत भी करता है और योग्य भी बनाता है।


दिमाग के लिए अध्ययन की उतनी ही जरुरत है  जीतनी शरीर को व्यायाम की।


नरम शब्दों से सख्त दिलों को जीता जा सकता है।


स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क रहता है


गुरु के प्रति विश्वास, नम्रता, विनय, और श्रद्धा के बिना हममें धर्म का भाव पनप नहीं सकता।


मनुष्य जैसा सोचता है वैसा बन जाता है ।


शिक्षक अर्थात गुरु  के व्यक्तिगत जीवन के बिना कोई शिक्षा नहीं हो सकती।


शिष्य के लिए आवश्यकता है शुद्धता, ज्ञान की सच्ची लगन के साथ परिश्रम की।

अगर आपका कोई सवाल या शिकायत है तो मुझे कमेंट जरूर करें।

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