कर्मों का फल ~ premchand ki kahani

कर्मों का फल माझे हमेशा आदमियों के परखने की सनक रही है और अनुभव के आधार उपर कह सकता हूँ कि यह अध्ययन जितना मनोरंजक, शिक्षाप्रद और उदधाटनों से भरा हुआ है, उतना शायद और कोई अध्ययन न होगा। लेकिन अपने दोस्त लाला साईदयाल से बहुत अर्से तक दोस्ती और बेतकल्लुफी के सम्बन्ध रहने पर … Read more

अनाथ लड़की ~ premchand ki kahani

अनाथ लड़की सेठ पुरुषोत्तमदास पूना की सरस्वती पाठशाला का मुआयना करने के बाद बाहर निकले तो एक लड़की ने दौड़कर उनका दामन पकड़ लिया। सेठ जी रुक गये और मुहब्बत से उसकी तरफ देखकर पूछा-क्या नाम है? लड़की ने जवाब दिया-रोहिणी। सेठ जी ने उसे गोद में उठा लिया और बोले-तुम्हें कुछ इनाम मिला? लड़की … Read more

नेकी ~ premchand ki kahani

नेकी सावन का महीना था। रेवती रानी ने पांव में मेहंदी रचायी, मांग-चोटी संवारी और तब अपनी बूढ़ी सास ने जाकर बोली—अम्मा जी, आज भी मेला देखने जाऊँगी। रेवती पण्डित चिन्तामणि की पत्नी थी। पण्डित जी ने सरस्वती की पूजा में ज्यादा लाभ न देखकर लक्ष्मी देवी की पूजा करनी शुरू की थी। लेन-देन का … Read more

सिर्फ एक आवाज ~ premchand ki kahani

सिर्फ एक आवाज सुबह का वक्त था। ठाकुर दर्शनसिंह के घर में एक हंगामा बरपा था। आज रात को चन्द्रग्रहण होने वाला था। ठाकुर साहब अपनी बूढी ठकुराइन के साथ गंगाजी जाते थे इसलिए सारा घर उनकी पुरशोर तैयारी में लगा हुआ था। एक बहू उनका फटा हुआ कुर्ता टॉक रही थी, दूसरी बहू उनकी … Read more

राजहठ ~ premchand ki kahani

राजहठ दशहरे के दिन थे, अचलगढ़ में उत्सव की तैयारियों हो रही थीं। दरबारे आम में राज्य के मंत्रियों के स्थान पर अप्सराएँ शोभायमान थीं। धर्मशालों और सरायों में घोड़े हिनहिना रहे थे। रियासत के नौकर, क्या छोटे, क्या बड़े, रसद पहुंचाने के बहाने से दरबाजे आम में जमे रहते थे। किसी तरह हटाये न … Read more

पुत्र-प्रेम ~ premchand ki kahani

पुत्र–प्रेम बाबू चैतन्यादास ने अर्थशास्त्र खूब पढ़ा था, और केवल पढ़ा ही नहींथा, उसका यथायोग्य व्याहार भी वे करते थे। वे वकील थे, दो-तीन गांवो मे उनक जमींदारी भी थी, बैंक में भी कुछ रुपये थे। यह सब उसी अर्थशास्त्र के ज्ञान का फल था। जब कोई खर्च सामने आता तब उनके मन में स्वाभावतः … Read more

वासना की कड़ियाँ ~ premchand ki kahani

वासना की कड़ियाँ बहादुर, भाग्यशाली कासिम मुलतान की लड़ाई जीतकर घमंउ के नशे से चूर चला आता था। शाम हो गयी थी, लश्कर के लोग आरामगाह की तलाश मे नज़रें दौड़ाते थे, लेकिन कासिम को अपने नामदार मालिक की खिदमत में पहुंचन का शौक उड़ाये लिये आता था। उन तैयारियों का ख़याल करके जो उसके … Read more

मिलाप ~ premchand ki kahani

मिलाप लाला ज्ञानचन्द बैठे हुए हिसाब-किताब जाँच रहे थे कि उनके सुपुत्र बाबू नानकचन्द आये और बोले- दादा, अब यहां पड़े -पड़े जी उसता गया, आपकी आज्ञा हो तो मौ सैर को निकल जाऊं दो एक महीने में लौट आऊँगा। नानकचन्द बहुत सुशील और नवयुवक था। रंग पीला आंखो के गिर्द हलके स्याह धब्बे कंधे … Read more

घमण्ड का पुतला ~ premchand ki kahani

घमण्ड का पुतला शाम हो गयी थी। मैं सरयू नदी के किनारे अपने कैम्प में बैठा हुआ नदी के मजे ले रहा था कि मेरे फटबाल ने दबे पांव पास आकर मुझे सलाम किया कि जैसे वह मुझसे कुछ कहना चाहता है। फुटबाल के नाम से जिस प्राणी का जिक्र किया गया वह मेरा अर्दली … Read more

आत्माराम ~ premchand ki kahani

आत्माराम वेदों-ग्राम में महादेव सोनार एक सुविख्यात आदमी था। वह अपने सायबान में प्रात: से संध्या तक अँगीठी के सामने बैठा हुआ खटखट किया करता था। यह लगातार ध्वनि सुनने के लोग इतने अभ्यस्त हो गये थे कि जब किसी कारण से वह बंद हो जाती, तो जान पड़ता था, कोई चीज गायब हो गयी। … Read more