काला पत्थर और बीरबल की बुद्धि | Sakbar birbal stories in hindi language

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Akbar Birbal moral stories
Akbar Birbal

एक बार अकबर ने सभी महान लोगों को अपनी बैठक में आमंत्रित किया। राज्य के सभी महान लोगों ने बैठक में भाग लिया जिसमें से बीरबल भी एक था। 

अकबर राजा कहने लगे-

 “आज मैंने आपको अपनी बुद्धिमानी जानने के लिए यहाँ बुलाया है”

 सब सोचने लगे कि आज महाराज हमसे कुछ सवाल पूछने वाले हैं। लेकिन ऐसा नहीं था।

अकबर ने यह जानने के लिए कि इन महान लोगों में सबसे बुद्धिमान कौन है। सभी लोगों को एक परीक्षा दी और सभी महान लोगों को एक काला पत्थर दिखाया। और कहने लगे –

“जो कोई एक महीने में इस काले पत्थर से हीरा बना सकता है वह मेरी नजर में सबसे बुद्धिमान होगा”

हर कोई सोचने लगा कि इस काले पत्थर से हीरा कैसे बनाया जा सकता है।

कुछ लोगों ने उस पत्थर को आम जनता को यह कहकर बेचना शुरू कर दिया कि यह आसमान से आया है।और कुछ ने इसे एक रहस्यमयी पत्थर बताकर आम जनता से पैसा कमाना शुरू कर दिया।

कई बुद्धिमान लोगों ने सामान्य लोगों में कहना शुरू कर दिया कि यह आपके सभी रोगों का इलाज कर सकता है। लेकिन किसी ने भी उस पत्थर का हीरे जितना मूल्य नहीं दिया। सब लोग परेशान होकर अकबर के पास गए और कहने लगे –

“महाराज इस काले पत्थर का कौन बेफकूफ हिरे जितना मूल्य देगा “

अकबर ने जवाब दिया –

“यह आप लोगों के बस की बात नहीं है आप लोग देखते रहिये  कि कैसे बीरबल इस काले पत्थर को हीरे में बदल देता है”

बीरबल ब्राह्मण पंडित का रूप बना कर दूसरे राज्य में उस पत्थर को हिरा बनाने के लिए चले गए । वहाँ पहुँचने के बाद उन्होंने वहां एक गाँव देखा जहाँ के  लोग बहुत अमीर थे। गांव के बीचों बिच एक पीपल का पेड़ था जो बीरबल ने देख लिया था। 

 बीरबल ने रात में जाकर उस पीपल के पेड़ के निचे वह पत्थर तिलक लगा कर रख दिया और दिन में जाकर गांव के लोगों को इकट्ढा किया और कहने लगे-

 “भाईयो मैं राजा अकबर के राज्य से आया हूँ”

गांव ने पूछा-

 “पंडित जी आप यहाँ क्यों आये हैं “

बीरबल ने जवाब दिया-

“मेरे सपने में कल रात शनिदेव आये थे और उन्होंने मुझे कहा-

मैं उस गांव में पीपल के पेड़ के निचे एक काले पत्थर के अवतार में प्रकट हुआ हूँ जो भी मेरी पूजा करेगा और दान करेगा मैं उसके सभी संकट हर लूंगा”

बस बीरबल की उस चालाकी से लोग उस पत्थर की पूजा करने लगे और वह दान भी करने लगे। सिर्फ एक महीने में बीरबल के पास दान में दिए इतने पैसे हो गए  कि उसने उनसे हिरा खरीद लिया। 

बीरबल वहां से अपने राज्य में वापिस चले गए और हिरा जाकर अकबर को दे दिया सभी अचम्भित हो गए फिर बीरबल ने बताया कि मैंने उस काले पत्थर से हिरा कैसे बनाया। सभी ने बीरबल की बुद्धि को मान लिया।

अकबर ने खुश होकर कहा बीरबल हमारे राज्य का वह हिरा है जिसकी कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती। 

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