जब बीरबल खरीद लिए गए short akbar birbal stories in hindi

अकबर बीरबल

 एक समय की बात है जब हर रोज की तरह राजा अकबर की सभा लगी हुई थी। सभा खत्म ही होने वाली थी कि उन्हें एक बहुत बड़ा तोहफा अचानक से मिला।

 उनका तोहफा ये था कि उनके प्रिय मित्र जो दूसरे राज्य के बहुत बड़े राजा और बहुत धनवान थे उनसे मिलने के लिए आये। अकबर बहुत खुश हुए उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था। 

अकबर उनसे बड़ी ही ख़ुशी से गले लगे और उनकी सेवा करने के लिए अपने नौकरों से कहने लगे। उनके नौकरों ने उनकी बहुत सेवा की। लेकिन अकबर के मित्र का इरादा अच्छा नहीं था वो एक विशेष कार्य के लिए अकबर से मिलने के लिए आये थे। जब अकबर बहुत ही खुश होते हैं तो उनका मित्र कहता है – महाराज मुझे आपसे कुछ चीज खरीदनी है। अकबर कहते हैं-

अरे आप बोलिये तो आपको क्या चाहिए आप जो भी चीज मुझसे माँगेंगे मैं आपको दूंगा पर वो चीज मेरे पास  होनी चाहिए। अकबर के मित्र ने कहा –

हाँ आपके पास वो चीज है पर आप मुझसे वादा कीजिये कि जो चीज मैं आपसे मांगूगा उसके लिए आप मुझे मना नहीं करेंगे। 

 अकबर ने सोचा अगर मैंने अपने मित्र को उसके द्वारा मांगी गयी चीज से मना किया तो उसका असर हमारी दोस्ती पर पड़ेगा। अकबर ने कहा -हाँ आप जो मांगेगे मैं आपको जरूर दूंगा। 

अकबर के मित्र ने जो माँगा वह सुनकर अकबर सन्न हो गए और सोचने लगे कि मैंने अगर इन्हे यह नहीं दिया तो मेरी मित्रता खतरे में पड़ जाएगी और अगर दे दिया तो राज्य खतरे में पड़ जायेगा। 

अकबर के मित्र ने जो माँगा था वह था अकबर के नवरत्नों ने से एक बीरबल। क्योंकि बीरबल ने अपनी बुद्धि से राज्य के विस्तार में बहुत बड़ी भागीदारी दी थी और हर एक मुश्किल को  बड़ी ही आसानी से हल कर लेते थे। अकबर के मित्र को असल में बीरबल की बुद्धि खरीदनी थी। 

अकबर ने यह बात जाकर बीरबल को बता दी और कहा – बीरबल हमें माफ़ कर देना हमारा मित्र आपको खरीदना चाहता है और मै उसे मना भी नहीं कर सकता। 

बीरबल बड़ी ही दुविधा में पड़ चुके थे। बीरबल पूरी रात न सो सके। बीरबल ने इस दुविधा का बहुत ही अच्छा हल निकला और सुबह अकबर से जा कर कहा- महाराज मैं आपके मित्र के पास जाने के लिए तैयार हूँ।  मैंने ऐसा हल निकला है कि वो कुछ ही दिन बाद मुझको आपके पास झोड़ कर जायेंगे।

अकबर को बीरबल के ऊपर पूरा विश्वास था। बीरबल के कहने से अकबर ने बीरबल को अपने मित्र के पास बेच दिया उनका मित्र खुश होकर अपने राज्य बीरबल को लेकर चले गए। वहां जाकर उन्होंने बीरबल को अपने खास लोगों में शामिल किया। 

क्योंकि अकबर से उनके मित्र ने बीरबल को खरीद लिया था इसलिए बीरबल अकबर के मित्र का हर एक काम करते थे पर उनके द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब नहीं देते। वह राजा बीरबल से उनकी सलाह लेने की  कोशिश करते पर बीरबल कुछ भी नहीं बोलते थे। 

एक दिन उस राजा ने परेशान होकर बीरबल से पूछ ही लिया बीरबल तुम मरे सवालों का जवाब और हमें सलाह क्यों नहीं देते जैसे राजा अकबर को दिया करते थे। बीरबल ने जो जवाब दिया उसे सुनकर आप आश्चर्यचकित रह जाओगे बीरबल ने जवाब दिया –

 राजा आपने सिर्फ पैसों से बीरबल को ख़रीदा है बीरबल की बुद्धि को नहीं। बीरबल की बुद्धि सिर्फ राजा अकबर के पास है और वो किसी भी कीमत पर नहीं खरीदी जा सकती। यह सुनकर राजा हक्का बक्का रह गया। 

राजा ने सोचा अब क्या किया जाये। राजा  ने बीरबल के सामने अपनी हार मान ली और बीरबल को अकबर के दरबार में छोड़ दिया। अकबर बीरबल को देखकर बहुत खुश हुए और अकबर ने बीरबल से पूछा

 ऐसा तुमने क्या किया कि इतने बुद्धिमान इंसान को  खरीदने के बाद भी उन्होंने तुम्हे हमारे पास छोड़ दिया। बीरबल ने जवाब दिया –

महाराज उन्होंने बीरबल को ख़रीदा था बीरबल की बुद्धि को नहीं। बस महाराज अकबर समझ चुके थे कि बीरबल जैसे बुद्धि मान इंसान को फसाना हर किसी के  बस की बात नहीं है।

 

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