बीरबल और सोने का अंडा देने वाली मुर्गी | stories in hindi language of akbar birbal

 एक समय की बात है जब राजा अकबर एक महीने के लिए अपने राज्य में भ्रमण करने के लिए गए। कही राज गद्दी खाली न रह जाये इसलिए उन्होंने 1 महीने के लिए सलीम को राज सिंहासन की जिम्मेवारी सौंपी जिसमे बीरबल को उनके साथ मिलकर सही निर्णय लेने का काम करना था। सलीम अभी नादान था। 

अकबर के राज्य भ्रमण के जाने के बाद राज्य के रसोइये ने एक विचित्र बात सलीम के दरबार में बताई। उसने कहा – राजकुमार सलीम मैंने जो मुर्गियां पाली थी उनमे से एक मुर्गी सोने का अण्डा देती है। 

सलीम ने बीरबल की सलाह के अनुसार वह मुर्गी दरबार में मंगवाई और उसके द्वारा दिया गया अंडा भी मगवाया। बीरबल को यकीन नहीं हो रहा था कि यह मुर्गी सोने का अंडा दे सकती है।

 बीरबल को संदेह हुआ। इसलिए बीरबल ने उस मुर्गी को एक अँधेरे और बिलकुल बंद कमरे ने रखने को कहा जिसके अंदर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी सिर्फ मुर्गी को दाना डालने के लिए रसोइये को उस कमरे में जाने अधिकार था। 

बीरबल उस कमरे का ध्यान रखता और जब रसोइया मुर्गी के पास दाना डालने के लिए जाता तो उसकी अच्छे से तलाशी ली जाती कि कहीं रसोइया ही इस मुर्गी के निचे अण्डा तो नहीं रखता। लेकिन जब बीरबल अगले दिन उस मुर्गी के कमरे में जाते हैं  और देखते हैं कि क्या सच में मुर्गी सोने का अंडा देती है ?

उन्होंने देखा कि सच मुच मुर्गी ने दो सोने के अंडे दिए थे बीरबल आश्चर्य चकित थे कि एक मुर्गी सोने का अंडा कैसे दे सकती है। बीरबल ने यह बात सभी को बता दी। एक दिन दूसरे राज्य का राजा जिसका नाम आदिराज था। दरबार में आया और कहने लगा –

राजकुमार सलीम हम अपने राज्य का एक हिस्सा जो आपकी सरहद पर लगता है और आपके पिता अकबर उसे बहुत पहले से लेना चाहते थे,  वह हम बेचना चाहते हैं। मैंने यह भी सुना है कि आपके पास सोने के अंडे देने वाली मुर्गी भी है तो आप उस जमीन का बहुत अच्छा दाम दे सकते हैं। 

सलीम ने सोचा कि अगर मैं इस जमीन को खरीद लूंगा तो मेरे पिता जी बहुत खुश होंगे और मेरे पास तो अब सोने का अंडा देने वाली मुर्गी भी है।

लेकिन उस ज़मीन की कीमत इतनी थी कि अकबर का पूरा धन खत्म हो जाता और जब धन खत्म होता तो कोई भी उनके ऊपर आक्रमण कर सकता था। 

बीरबल ने खतरा भांप लिया और सलीम से कहा –

राजकुमार निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें।

सलीम ने वैसा ही किया। बीरबल ने उस मुर्गी की सचाई जानने का निर्णय लिया और मुर्गी के कमरे में छिप कर बैठ गए। 

बीरबल ने देखा कि राजा आदिराज का पाला हुआ बाज वहां अंडे लेकर रोशनदान से आता था और रसोइया उन्हें मुर्गी की टोकरी में रख देता था बीरबल को अब पता चल चूका था कि माज़रा क्या है। 

बीरबल ने यह बात किसी को नहीं बताई और अलगे दिन आदिराज को सभा में यह कहकर बुलाया कि हम आपकी जमीन खरीद लेंगे उसी दिन राजा अकबर भी राज्य का भ्रमण करके वापिस आ गए। बीरबल ने सभी के सामने आदिराज का पर्दाफाश किया। अकबर पूछते हैं कि –

मेरे जाने के बाद क्या हुआ था ?

बीरबल ने जवाब दिया –

 महाराज हमारे रसोइये ने हमारे साथ धोख किया है उसने राजा आदिराज के साथ मिलकर सोने के अंडे देने वाली मुर्गी का षड्यंत्र रच कर हमारे खजाने को खाली करके हमारे राज्य पर आक्रमण करने की सलाह  बनाई थी। अगर सलीम वह जमीन खरीद लेता तो हमारा खजाना खत्म हो जाता और राजा आदिराज की सेना हमपर आक्रमण  देती। 

अकबर के आदेशानुसार रसोइये और राजा आदिराज को बंदी बना लिया गया। इस मुश्किल का हल बीरबल के आलावा कोई और नहीं निकाल सकता था। सभी ने तो समझ लिया था कि सच में यह मुर्गी सोने  का अंडा देती है अकबर ने हंसते हुए राजा आदिराज से कहा-

 जब तक हमारे पास बीरबल हैं हमारे राज्य को कोई हरा नहीं सकता बीरबल ने अकबर के राज्य को बहुत बड़े खतरे से बचा लिया था। 

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