बीरबल की शतरंज | akbar birbal short stories in hindi with pictures

Akbar Birbal Stories in Hindi
Akbar Birbal

एक समय की बात है जब अकबर के दरबार में हर रोज की तरह सभा बड़ी जोर शोर से लगी हुई थी। अकबर के बड़े बड़े मंत्री अपने राज्य की हालत के बारे में अकबर को बता रहे थे। सोच विचार कर रहे थे और अपने विचार अकबर के सामने रख रहे थे तभी एक राजा अकबर के दरबार में अपने दो साथियों के साथ आता है और कहता है-

महाराजा अकबर मेरे साथ जो आप ये दो व्यक्ति देख रहे हैं ये दोनों मेरे मित्र हैं और मैं आपको चुनौती देने आया हूँ। अगर आपके राज्य का कोई भी व्यक्ति मेरे दोनों मित्रों  में से एक को  शतरंज के खेल में हरा देगा तो मैं हर साल आपको 2 लाख मोहरें दिया करूँगा अगर नहीं हरा पाए तो आपको हमारी सिमा में लगने वाली सोने की खदाने हमें देनी होंगी।

अकबर ने यह चुनौती स्वीकार नहीं की। क्योंकि उस समय बीरबल बीमार थे और राजमहल में नहीं थे राजा अकबर अपने सभी फैसले बीरबल से सोच विचार करके ही लेते थे। इस पर वह राजा कहने लगा –

अरे मैंने सुना था अकबर के राज्य में बड़े-बड़े बुद्धिमान लोग हैं पर यह तो झूठ है यहाँ तो मुझे मेरे मित्रों से शतरंज खेलने वाला कोई भी नहीं दिख रहा। दरबार में अकबर के बेटे सलीम भी मौजूद होते हैं यह सुनकर सलीम को गुस्सा आ जाता है और सलीम कहते हैं मैं तुम्हारे मित्रों को शतरंज में हराऊंगा।

पर सच तो यह था कि उस राजा के मित्रों को शतरंज में हराना किसी के बस की बात नहीं थी वे दो केवल एक दूसरे को शतरंज में हरा सकते थे। अकबर इस फैसले से बहुत परेशान हो गए।  वह जानते थे कि उन्हें हराना सलीम के बस की बात नहीं है। राजा अकबर ने अपनी परेशानी बीरबल को बताई। बीरबल ने कहा – महाराज मुझे  समय दीजिये।

बीरबल उन खिलाडियों बारे  में जानते थे कि वे केवल एक दूसरे को ही हरा सकते हैं बाकि  उन्हें कोई नहीं हरा सकता। अकबर को पूरा विश्वास था कि बीरबल इस समस्या का जरूर समाधान निकालेंगे।

अगले दिन बीरबल ने सलीम को अपनी चाल समझा दी। बस अकबर को यकीं हो चूका था कि अब सलीम उन दोनों को जरूर हरा देगा। दरबार में शतरंज लगाई गई दोनों को अलग अलग बिठाया गया।

सलीम ने बीरबल के बताये अनुसार पहली चाल चलने को कहा पहले खिलाडी ने अपनी पहली चाल चली। सलीम  दूसरे खिलाडी के पास गए और पहली चाल खुद चली। फिर सलीम पहले वाले खिलाडी के पास गए और अपनी चाल चली। फिर पहले खिलाडी ने अपनी चाल चली।

उसके  बाद सलीम दूसरे खिलाडी के पास गए और अपनी चाल चली। बस ऐसे ही चलता रहा सलीम पहले खिलाडी के पास  चाल चलने के लिए जाते फिर दूसरे खिलाडी के पास चाल चलने के जाते।

खेलते खेलते पहले खिलाडी ने सलीम को हरा दिया और सलीम ने दूसरे खिलाडी को हरा दिया। राजा के वादे के मुताबिक सलीम ने एक खिलाडी को हरा दिया था जिससे राजा को दो लाख मोहरें अकबर को हर साल देनी पड़ी।

अब अकबर का बीरबल से सवाल यह था जो आपके दिमाग में भी होगा कि ऐसे शतरंज के खिलाडी जो आजतक किसी से नहीं हारे और जो सिर्फ आपस में ही हार सकते थे उन्हें सलीम ने कैसे हरा दिया। 

बीरबल जोर जोर से हंसने लगे और कहा –जहाँपना वो राजा के मित्र असल में आपस में ही शतरंज खेल रहे थे तो उनमे से किसी एक को तो हारना ही था। अकबर कहते हैं –

अरे बीरबल क्या कह रहे हो हमारे सामने तो सलीम उन दोनों से शतरंज खेल रहा था न कि वो आपस में खेल रहे थे। इस पर बीरबल कहते हैं –

महाराज जब पहले खिलाडी ने अपनी पहली चाल चली तो  दूसरे खिलाडी के पास जा कर सलीम ने वही चाल दूसरे खिलाडी के पास चली। इस तरह पहले खिलाडी की हर चाल सलीम दूसरे खिलाडी के पास चलता था। इस तरहं जब पहले खिलाडी ने सलीम को हराया ठीक वैसे ही सलीम ने दूसरे को हराया। महाराज इस तरहं वो खिलाडी आपस में ही खेल रहे थे। अकबर ने कहा –

वाह…… बीरबल जिन खिलाडियों को आजतक कोई नहीं हरा पाया उन्हें तुमने बिना खेले ही हरा दिया। क्या आपको यह अकबर बीरबल की कहानी समझ में आयी अगर आपको यह कहानी समझ में आ गई तो आप बहुत ही समझदार हैं अगर नहीं तो हमें कमेंट जरूर करें।

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