समझदार पापा की प्रेणादायक कहानी | stories for kids in Hindi

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समझदार पापा

(समझदार पापा की कहानी)  

एक समय की बात है एक छोटे से गांव में एक बहुत ही मेहनती किसान रहता था उस किसान का नाम राम था। 


वह बहुत अधिक मेहनत करके फसल उगाता था और उसे काटने के बाद बाजार में बेच देता था जिससे उसके पास परिवार के पालन पोषण के लिए पैसे आ जाते थे।  

उस किसान के 2 बेटे थे जिनका नाम चिंटू और  पिंटू था।  जिन्हे वह बहुत प्यार करता था। उनके लिए वह हर रोज खाने के लिए नई चीजें लाता था और वे बहुत खुश हो जाते थे। 


लेकिन किसान एक बात से बहुत दुखी था कि वह हमेशा झगड़ते रहते थे। घर का काम नहीं करते थे छोटी छोटी बात पर झगड़ना शुरू कर देते थे।


 समय बीतता चला गया पर उनका झगड़ना कभी भी बंद नहीं हुआ देखते ही देखते चिंटू 10 साल का हो गया और पिंटू 9 साल का हो गया। 


उनके पापा ने उन्हें स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दिया वह स्कूल इकढ्ठा नहीं जाते थे। एक समय ऐसा आया कि चिंटू की स्कूल में एक लड़के के साथ लड़ाई हो गई वह लड़का बहुत ही बुरा था। 


चिंटू अकेला था इसलिए उस लड़के का कुछ नहीं कर पाया क्योंकि वह बहुत ताकतवर था। वह रोते रोते अपने घर चला गया। जब उसका पापा खेतों से काम करके घर लोटा तो उसने उस बुरे लड़के की शिकायत अपने पापा से कर दी। 


राम बहुत दुखी हुआ। राम ने बहुत मेहनत करके एक उपाए सोचा। 


अगले दिन जब चिंटू और पिंटू स्कूल से वापिस आये तो उनके पापा ने चिंटू और पिंटू को  खाने के लिए मीठी चीज दी और दोनों को एक साथ बिठाया।


  चिंटू और पिंटू के पापा ने बड़ी चालाकी से चिंटू को खाने के लिए कम चीज दी और पिंटू को ज्यादा। वह जानता था कि दोनों को एक बराबर चीज न देने पर वह झगड़ेंगे और वैसा ही हुआ।


 चिंटू और पिंटू झगड़ने लगे। उनके पापा ने उन्हें समझाया कि –

“अगर तुम आपस में लड़ोगे तो तुम्हे कोई भी पिट कर चला जायेगा”। 


चिंटू और पिंटू तब भी नहीं माने। 


उसके बाद चिंटू और पिंटू के पापा ने चिंटू को एक लकड़ी निकाल कर दी और कहा-


“अब इसे तोड़ो”


चिंटू ने लकड़ी आराम से तोड़ दी और कहा-


 “पापा मैंने लकड़ी तोड़ दी है” 


फिर  उसके पापा ने उसे एक साथ दो लकड़ियां दी और कहा-


“अब इन दो लकड़ियों को एक साथ तोड़ो”


 चिंटू ने पहले वाली लकड़ी से ज्यादा जोर लगाया और  दोनों लकड़ियां तोड़ दी। 


फिर उनके पापा ने चिंटू को तीन लकड़ियां दी और कहा –


“अब इन्हे तोड़ कर दिखाओ “


चिंटू को लकड़ियां तोड़ते हुए बहुत मजा आ रहा था। चिंटू ने पूरा जोर लगाकर तीनो लकड़ियां तोड़ दी। 


आखिर में चिंटू के पापा ने चिंटू को 4 लकड़ियां दी और कहा-


 “अब इन्हे तोड़ के दिखाओ”


 चिंटू ने पूरा जोर लगा दिया पर चिंटू से लकड़ियां नहीं टूटी और अपने पापा से कहने लगा-


 “ये मुझसे नहीं टूटेंगी”


तभी चिंटू के पापा ने कहा कि –


“तुम दोनों इसे मिल कर तोड़ो”


चिंटू और पिंटू ने लकड़ियों को दोनों तरफ से पकड़ा और बड़ी आसानी से लकड़ियां तोड़ दी। 


इसके बाद चिंटू और पिंटू के पापा ने उन्हें शिक्षा दी कि –


“अगर तुम इन लकड़ियों की तरह साथ रहोगे झगडोगे नहीं तो तुम्हे आसानी से कोई नहीं हरा सकता। 

अब चिंटू और पिंटू को समझ  आ गया था। अब वे इकठा स्कूल में जाते और किसी भी बुरे लड़के से झगड़ा होने पर दोनों उससे निपटते। 


चिंटू और पिंटू के प्यार की सब तारीफ करते। चिंटू और पिंटू अब प्यार से अपने पापा के साथ रहते हैं और उनका कहना मानते हैं। 


(कहानी की शिक्षा )

कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा मिल जुल कर रहना चाहिए। क्योंकि मुसीबत आने पर अकेला व्यक्ति कभी कुछ नहीं कर सकता केवल साथ रहने से मुसीबत को हल किया जा सकता है यानी कि एकता में बल है 

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