1.4 बुद्धिमान खरगोश और शेर की कहानी (Panchatantra Short Stories In Hindi With Moral)

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एक जंगल में एक भासरुक नाम का शेर रहता था जो धीरे-धिरे जंगल के सभी प्राणियों को खा रहा था कोई भी प्राणी उससे नहीं बच सकता था।  एक दिन जंगल के प्राणियों ने यह देखा कि  धीरे-धीरे हमारे वंश समाप्त हो रहे हैं इस लिए हमें कोई उपाय करना चाहिए। 

जंगल के प्राणियों ने उस शेर के साथ बात की और कहा-

“हे जंगल के राजा आप जगल के सभी प्राणियों को धीरे धीरे नष्ट कर रहे हैं इसलिए एक ऐसा उपाय करते हैं जिससे आपकी भूक भी मिट जाये और हमारा वंश भी खत्म न हो।” 

इसपर शेर कहता है –

यह कैसे संभव है?

जंगल के प्राणियों में से एक ने कहा- 

“राजा आपको मेहनत करने की कोई जरुरत नहीं है हमारे में से एक प्राणी आपकी भूख मिटाने के लिए खुद चलकर आया करेगा।” 

तभी भासरुक शेर कहता है –

“अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं तुम सब को अपना भोजन बना लूंगा। “

इस तरह सभी प्राणियों की बारी आती और शेर उन्हें अपना भोजन बना लेता। एक दिन एक खरगोश की बारी आई। 

खरगोश ने सोचा अगर मैंने कोई उपाए नहीं किया तो यह ऐसे ही सभी प्राणियों को खाता रहेगा। जाते हुए खरगोश ने एक कुआ देखा और उसके दिमाग में एक तरकीब आयी। खरगोश जान भूझकर शेर के पास देर से गया। 

 इस ओर भासरुक शेर के मन में यह ख्याल आता है कि अगर आज कोई मेरा भोजन बनने के लिए नहीं आया तो मैं सभी प्राणियों को खा जाऊंगा।

लेकिन कुछ देर बाद वहां खरगोश आ जाता है। 

भासरुक शेर कहता है-

“छोटे से प्राणी तू इतनी देर से क्यों आया अब अपने भगवान को याद कर ले। ”

इसपर खरगोश ने एक कहानी बनाई और कहा  –

“हे जंगल के राजा हमारे मुखिया ने हमें छोटा प्राणी समझ कर और आपकी भूख सिर्फ एक खरगोश से न मिटे, इसलिए मेरे साथ तीन ओर खरगोशों को भेजा था लेकिन रास्ते में किसी दूसरे शेर ने हमें रोक लिया और कहा-

कहाँ जा रहे हो तुम अब अपने इष्ट देव को  याद कर लो क्योंकि मैं तुम्हे अपना भोजन बना लूंगा। 

मैंने कहा- 

हम अपने स्वामी दूसरे शेर का खाना बनाने के लिए जा रहे हैं। 

इसपर शेर कहता है –

अरे वो शेर मुर्ख है जो बैठे बैठे तुम्हे खाता है इसलिए मुझसे उसका मुकाबला करवाओ जो जीतेगा तुम उनका ही भोजन बनोगे। 

इस तरह उस शेर ने तीनो खरगोशों को अपने पास रख लिया और मुझे आपके पास यह सन्देश देने के लिए भेज दिया।” 

 भासरुक शेर ने कहा –

ये कौन सा शेर है जो मेरी जगह लेना चाहता है तू मुझे उसके पास ले चल। 

इस तरह खरगोश आगे आगे और शेर पीछे पीछे चलता है। खरगोश उसे उस कुए के पास ले जाता है और कहता है-

“महाराज वो इस बिल में घुसा है शेर कुए में देखता है उसे  पानी में अपनी परझाई दिखती है और वह खुर्राता है जिससे उसकी आवाज कुए में गूंजती है। शेर सोचता है ये वही शेर है जो मुझसे लड़ना चाहता है और कुए में झलांग लगा कर अपनी जान गंवा देता हैं। 

 शिक्षा 

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि जिसमे बुद्धि है उसमे बल है। 

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