चौथ व्रत में ये कहानी जरूर पढ़ें | chauth mata ki kahani

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 chauth mata ki kahani
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चौथ माता की कहानी की जानकारी 

कहानी पढ़ने से पहले कहानी के बारे में आपको कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारी बता दें कि इस कहानी को आप चौथ के व्रत में सुन सकते हैं और इस कहानी के बाद गणेश जी की कहानी भी सुनी जाती है। इस कहानी को पढ़ने मात्र से चौथ माता का आशीर्वाद व्रत रखने वाली महिलाओं को मिलता है 
 
उनकी हर मनोकामना पूरी होती है अगर आप चाहें तो इस कहानी को नॉट भी कर सकते हैं। या हमारी वेबसइट पर आकर हर महीने इस कहानी को पढ़ सकते हैं। यह कहानी बहुत पुरानी मानी जाती है। तो आईये जानते हैं चौथ माता की सूंदर कहानी

चौथ माता की भक्त (chauth mata ki kahani)

एक गांव में एक गरीब बूढ़ी माँ रहा करती थी ईश्वर की कृपया से उसका एक बेटा भी था। वह अपने बेटे से बहुत ज्यादा प्यार करती थी। इसलिए अपने बेटे की लम्बी उम्र और सलामती के लिए 12 महीने के चौथ माता के व्रत रखती थी। 
 
चौथ माता का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र और अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, सही सलामती के लिए रखती हैं।

बूढ़ी महिला के व्रत रखने का तरीका  (chauth mata ki kahani)

 वह बूढी महिला हर चौथ के व्रत में शहर जाकर अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार पन्सारी की दुकान से थोड़ा सा घी और गुड़ लाती थी और 4 लड्डू बनाती थी। 
 
चार लड्डुओं में से वह महिला एक से पूजा करती, एक लड्डू हथकार के लिए निकालती, एक से वह चन्द्रमा के दर्शन करके स्वँय खा लेती और एक अपने बेटे के लिए रख देती थी। 

बेटे की नकारात्मक सोच (chauth mata ki kahani)

एक बार उसका बेटा अपनी ताई से मिलने के लिए गया जब अपनी ताई के घर पहुंचा तो उसने देखा कि  उन्होंने वैशाख चौथ का व्रत रखा हुआ था। उत्सुकता से लड़के ने पूछा कि मेरी माँ तो 12 चौथ का व्रत करती है इस पर उसकी ताई ने बोला की तेरी माँ तो तेरी कमाई खाने के लिए ये व्रत करती है। 
 
लड़के ने सोचा की ताई सच कह रही है वह बुढ़िया लड्डू खाने के लिए व्रत रखती है। लड़के के दिमाग में नकारात्मक विचार घर कर गए थे 

बेटे का प्रदेश जाना  (chauth mata ki kahani)

घर आकर लड़का अपनी माँ से बोलता है कि-
 
 “मैं प्रदेश जा रहा हूँ तू मेरी सारी कमाई खा लेती है।” 
 
इसपर माँ ने उसे बहुत समझाया पर नकारात्मक सोच उसे प्रदेश जाने पर मजबूर कर रही थी। 
 
उस बूढ़ी माँ के लाख मनाने पर भी वह नहीं माना इसलिए उसकी माँ ने उसे साथ ले जाने के लिए चौथ माता के आखे दिए और अपने बेटे से कहा कि-
 
“यह आखे मुसीबत में तुम्हारे काम आएंगे”। 
 
बेटा कुछ समझ नहीं पा रहा था लेकिन उसने अपनी माँ कि बात मान ली।

चौथ माता के आखो का चमत्कार  (chauth mata ki kahani)

 वह प्रदेश जाने के लिए यात्रा कर रहा था कि उसको एक नगर में जाते समय रस्ते में एक बूढ़ी माँ देखी लड़के ने ध्यान से देखा कि बुढ़िया रोती हुई जा रही थी और पुए बनाती जा रही थी। 
 
वह रो भी रही थी और पुए भी बना रही थी। लड़के ने पास जाकर उस बुढ़िया से उसके रोने का कारण बड़ी उत्सुकता से पूछा। 
 
बूढ़ी माँ ने जवाब दिया कि-
 
 “बेटा इस नगर की पहाड़ी पर एक दैत्य रहता है। पहले तो वह खाने के लिए इस नगर के लोगों को मार दिया करता था वह लोगों को मारकर खा जाता था। उसके इस अत्याचार को रोकने के लिए नगर में यह व्यवस्था की गई कि हर घर से एक आदमी को दैत्य के पास भेजा जायेगा और आज मेरे बेटे की बारी है इसीलिए रो रही हूँ और उसी के लिए पुए बना रही हूँ।”
 
 उस लड़के ने काहा-
 
“तुम ये खीर पुए मुझे खिला दो मैं तुम्हारे बेटे की जगह उस दैत्य के पास चला जाऊंगा” 
 
बूढ़ी माँ ने लड़के की ये बात स्वीकार की। लड़के ने खीर पुए बड़े चाव से खाये और खाकर आराम से सो गया। सोते-सोते उसे श्याम हो गई।  
 
श्याम को उस बूढ़ी माँ के पास राजा के सैनिक आये और कहा-
 
 “कहाँ है तुम्हारा बेटा” बूढ़ी माँ ने लड़के से काहा कि राजा के सैनिक तुम्हें दैत्य के पास ले जाने के लिए आ गए हैं। वह लड़का खुशी से सैनिकों के साथ दैत्य के पास चला गया दैत्य के पास जाकर उसने देखा कि दैत्य तो बहुत भयानक है। 
 
अपनी जान बचाने के लिए वह इधर-उधर भागने लगा तभी उसको याद आया कि उसकी माँ ने उसे चौथ माता के आखे दिए थे और कहा था कि मुसीबत में यह तुम्हारे काम आएंगे।
 
 उस लड़के ने चौथ माता के आखे निकले और उन्हें दैत्य की तरफ फैंका और कहने लगा-
 
 “हे चौथ माता अगर मेरी माँ सच्चे दिल से मेरी सलामती के लिए व्रत रखती है दैत्य का सर कटकर जमीन पर गिर जाये”
 
यह चौथ माता का चमत्कार ही है कि उसका ये वचन कहते ही दैत्य का सर कटकर निचे गिर गया। लड़का सही सलामत वापस आ गया। वापस आते देख उसे राजा ने अपने दरबार में बुलाया और बहुत से उपहार देकर रवाना किया। 

चौथ माता का आवे में चमत्कार  (chauth mata ki kahani)

लड़का अपने रस्ते पर आगे बढ़ गया। चलते हुए कुछ समय बाद वह दूसरे राज्य में पहुँचा। उस राज्य में एक प्रथा प्रचलित थी कि बर्तनो के आवे को पकने के लिए एक इंसान की बलि दी जाती थी 
 
(आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आवा उसे कहा जाता है जब कच्चे मिटटी के बर्तनो को पकाने यानि पक्का करने के लिए आग में पकाया जाता है वह बहुत ही विशाल भट्टा होता है।) राज्य से जाते देख सैनिकों ने उसे पकड़ लिया और आवे में चिनवा दिया।  
 
और आवे को पकाने लगे लड़के ने फिर से चौथ माता के आखे निकाले और बोला –
“हे माता अगर मेरी माँ मेरे लिए बिना किसी स्वार्थ के व्रत रखती है तो आवा पकने पर मेरी मृत्यु न हो”
लड़के के ये शब्द बोलते ही आवा पकने पर लड़के की मृत्यु नहीं हुई।
जब आवे के बर्तन निकालने लगे तो आवे से मिट्टी की बजाय सोने और चाँदी के बर्तन निकले और लड़के ने अंदर से कहा-
 “बर्तन आराम से निकालना कहीं मुझे लग न जाये” 
ये सुनकर बर्तन निकालने वाले आश्चर्यचकित हो गए और उसे आवे से निकाल कर राजा के दरबार में ले गए। राजा भी आश्चर्यचकित था।
राजा ने  लड़के से प्रश्न किया कि-
 “आखिर तुम इस  आवे से जिन्दा कैसे बच गए।” 
लड़के ने जवाब दिया कि-
 “मेरी माँ मेरे लिए चौथ के 12 महीने व्रत रखती है इसलिए चौथ माता की कृपा से मैं इस आवे से सही सलामत वापिस निकल आया।”

राजा की पुत्री से विवाह  (chauth mata ki kahani)

 राजा को लड़के की बात पर यकीन नहीं हो रहा था। इसलिए राजा अपनी आँखों से चौथ माता का चमत्कार देखना चाहते था इसलिए राजा ने चाँदी की सुराही मँगवाई और
 लड़के से कहा कि-
 “अगर तुम सच बोल रहे हो तो सुराही की नली से निकल कर दिखाओ”। 
(आपकी जनकारी के लिए बता दें कि सुराही एक पात्र (बर्तन)  होता है जो घड़े जैसा होता है फर्क सिर्फ इतना है कि इसका मुँह घड़े के मुकाबले अधिक लम्बा और बारीक़ होता है।)
उस लड़के ने देखा कि एक भँवरा सुराही के मुँह से बहार निकला है। लड़के ने चौथ माता का नाम लेकर आखे बहार निकले और
 कहा कि-
 “हे चौथ माता अगर मेरी माँ तुम्हारे 12 महीने के व्रत रखती है तो मैं भँवरा बनकर सुराही के मुँह से बहार निकल जाऊं”। 
देखते ही देखते राजा की आँखों के सामने वो लड़का भँवरा बन गया और सुराही के मुँह से बाहर निकल गया।
राजा ने यह चमत्कार देखा और आश्चर्यचकित हो गया और राजा बहुत खुश हुआ राजा इतना खुश हुआ की राजा ने अपनी पुत्री की शादी उस लड़के से कर दी।
पुरे नगर में राजा ने प्रचार करवा दिया कि नगर की सारी महिलाएं चौथ माता का व्रत करना आरम्भ कर दें।

बेटे का घर वापिस जाना  (chauth mata ki kahani)

कुछ समय बीत जाने के बाद लड़के को अपनी माँ की याद आयी कि मेरी माँ तो बिना किसी स्वार्थ के मेरी सही-सलामती के लिए व्रत रखती थी। तभी मैं चौथ माता के आशीर्वाद से अभी तक सही सलामत हूँ।
 इस कारण लड़के ने राजा से अपने नगर जाने की इच्छा प्रकट की राजा ने उसकी बात मान ली और बहुत दान, दहेज़ और हाथी, घोड़े देकर विदा किया।
लड़के की कईं दिन की  यात्रा के बाद वह अपने घर पहुँचा जिस दिन वह घर पहुँचा उस दिन चौथ का दिन था। लड़का उसी पन्सारी की दुकान में गया जहाँ उसकी माँ हर चौथ को आती थी।
लड़के से सोचा की आज  माँ इस दुकान से गुड़ और घी लेने आएगी। जैसा लड़के ने सोचा था ठीक वैसा ही हुआ हाथ में लाठी लिए हुए उसकी माँ रस्ते से आते हुए इसकी दिखी।
उसकी माँ की उम्र बहुत अधिक हो जाने के कारण उन्हें दिखना कम हो गया था। तो लड़के ने उसकी लाठी में पैर मारा और जानभूझ कर पुत्र के बारे में अपशब्द कहने लगा।
उस बूढ़ी माँ ने कहा भले ही मुझे गाली दे दो पर मेरे पुत्र को कुछ मत कहना। माँ के यह शब्द सुनकर बेटा उनके पैरों में गिर पड़ा और कहने लगा-
 “मैं तुम्हारा ही बेटा हूँ मुझे माफ़ कर दो”।

चौथ माता का चमत्कार  (chauth mata ki kahani)

 माँ ने उसे पहचाना और गले लगाया। पर उनका बेटा इतनी धन दौलत के साथ वापिस आया था इसलिए नगर वासियों ने विश्वास नहीं किया कि वह उनका ही बेटा है।
बुढ़िया ने चौथ माता को याद किया और मन ही मन चौथ माता से कहने लगी कि मैंने अगर सच्चे दिल से तुम्हारे व्रत किये हैं तो मेरे स्तनों में दूध आ जाये और दूध की धार मेरे बेटे के मुँह में गिरे चौथ माता  चमत्कार से बिलकुल ऐसा ही हुआ दूध की धार उनके बेटे के मुँह में गिरने लगी।
सभी लोग देखकर हक्के-बक्के हो गए उन्हें यकीं हो गया कि यह उन्ही का बेटा है और चौथ माता की जय जय कार करने लगे।
उस नगर के सभी लोग चौथ माता का व्रत हर महीने रखने लगे
बोलो- “चौथ माता की सदा ही जय “
 
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