पंचतंत्र की सरल और नैतिक कहानियां 2022 | Panchatantra Stories in Hindi

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panchatantra stories in hindi
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पंचतंत्र क्या है ? (Panchatantra Stories in Hindi)

आपने कभी न कभी तो ऐसी कहानियां तो सुनी ही होंगी जिनमे शिक्षा दी जाती है वह कहानियां हमें बुद्धिमान बनाने का काम करती है उन्हें पंचतंत्र की कहानिया कहा जाता है पचतंत्र एक किताब है जो मुर्ख से मुर्ख व्यक्ति को पशु पक्षियों की कहानियों के माध्यम से बुद्धिमान बना देती है। इसका इतिहास कुछ इस प्रकार है। 

एक समय था जब महिलारोप्य नाम का एक नगर हुआ करता था उस नगर का राजा जिसका नाम अमरशक्ति था बहुत महान  था। लेकिन उनके तीन पुत्र थे जिनका नाम बहुशक्ति, उग्रशक्ति, अनेकशक्ति था राजा उनसे बहुत परेशान था क्योंकि वह बहुत मुर्ख थे। एक दिन राजा ने परेशांन होकर और उन्हें पढाई लिखाई से  विमुख देख एक सभा बुलाई और अपने मंत्रियों से कहा-

“आप लोग जानते हैं कि मेरे तीन पुत्र बुद्धि हीन हैं उनमे से कोई भी मेरे बाद राजपाठ सँभालने योग्य नहीं है। इसलिए कोई ऐसा उपाए कीजिये जिससे इनकी बुद्धि का विकास किया जा सके”।

तभी एक पंडित बोले-

“महाराज सिर्फ़ व्याकरण का अध्ययन करने में ही बारह वर्ष का समय लग जायेगा और उसे बाद शास्त्र आदि का ज्ञान दिया जाता है जिससे बुद्धि का विकास होता है”।

इसपर एक मंत्री बोलता है –

“महाराज यह जीवन नाशवान है इसलिए हमें किसी छोटे और बुद्धि का विकास करने वाले शास्त्र के बारे  विचार करना चाहिए। 

राजा कहता है –

“क्या यह संभव है कि बहुत कम समय में ही सभी शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त हो सके। क्या तुम किसी ऐसे विद्वान को जानते हो। 

मंत्री ने कहा –

 हाँ मैं ऐसे विद्वान को जनता हूँ जो बहुत ही कम समय  में आपके पुत्रो को बुद्धिमान बना सकता है उनका नाम पंडित विष्णु शर्मा है। 

राजा के कहने पर अगले दिन विष्णु शर्मा को राजा के सामने पेश किया जाता है। राजा ने विष्णुशर्मा को अपनी दुविधा सुनाई। 

इसपर विष्णुशर्मा ने  कहा-

“राजन मैं आपके पुत्रों को केवल छः महीने में ही बुद्धिमान और शास्त्रों के ज्ञाता बना दूंगा”। 

राजा यह बात सुनकर बहुत खुश हुआ और कहा –

“अगर आप ऐसा कर सकते हो तो मैं आपको 50 गांव इनाम के तौर पर दूंगा”। 

वीष्णुशर्मा ने कहा –

राजा मुझे कुछ नहीं चाहिए बल्कि अगर मैं ऐसा नहीं कर पाया तो अपना नाम बदल दूंगा। इस तरह विष्णुशर्मा ने उनके तीनो पुत्रों को मात्र छः महीने में ही शास्त्रों के ज्ञाता और बुद्धिमान बनाया। 

 

विष्णु शर्मा ने सभी शास्त्रों के अध्ययन को पांच भागों में बाँट दिया था जो बहुत छोटे थे। इस लिए इसे पंचतंत्र कहा गया है। 

ये पांच भाग हैं –

  • मित्रभेद  (मित्रों में मनमुटाव एवं अलगाव )
  • मित्रसम्प्राप्ति (मित्र प्राप्ति एवं उसके लाभ)
  • काकुलुकीय  (कौवे एवं उल्लुओं की कथा)
  • ळब्दप्रनाश  (मृत्यु या विनाश के आने पर)
  • अपरीक्षितकारक  (हड़बड़ी में क़दम न उठायें)

पंचतंत्र में शास्त्रों को बहुत ही सरल भाषा और पशु पक्षियों की कहानी के माध्यम से बताया गया है। यह बच्चों से लेकर बड़ों सभी की बुद्धि के विकास के लिए बहुत उपयोगी है सभी पंचतंत्र की कहानियां निचे से पढ़ सकते हैं। 

 

यहाँ से सुने

पंचतंत्र की कहानियां (panchatantra stories in hindi)

मित्रभेद ~ मित्रों में मनमुटाव एवं अलगाव (panchatantra stories in hindi)

इस तन्त्र में अनेक प्रकार की शिक्षाएं दी गई है जैसे कि धैर्य से व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थिति का भी सामना कर सकता है अतः प्रारब्ध के बिगड़ जाने पर भी धैर्य का त्याग नहीं ………


मित्रसम्प्राप्ति ~ मित्र प्राप्ति एवं उसके लाभ (panchatantra stories in hindi)

इस तन्त्र में मित्र की प्राप्ति से कितना सुख एवं आनन्दप्राप्त होता है वह कपोतराज चित्रग्रीव की कथा के माध्यम से बताया गया है। विपत्ति में मित्र ही ………


काकुलुकीय ~ कौवे एवं उल्लुओं की कथा (panchatantra stories in hindi)

इसमें युद्ध और सन्धि का वर्णन करते हुए उल्लुओं की गुहा को कौओं द्वारा जला देने की कथा कही गयी है। इसमें यह बताया गया है कि स्वार्थसिद्धि के लिए शत्रु को भी मित्र बना लेना चाहिए और बाद में धेखा देकर उसे नष्ट कर ………


ळब्दप्रनाश ~ मृत्यु या विनाश के आने पर (panchatantra stories in hindi)

इस तन्त्र में वानर और मगरमच्छ की मुख्य कथा है और अन्य अवान्तर कथाएं हैं। इन कथाओं में यह बताया गया है कि लब्ध अर्थात् अभीष्ट की प्राप्ति होते होते कैसे रह गई अर्थात नष्ट ………


अपरीक्षितकारक ~ हड़बड़ी में क़दम न उठायें (panchatantra stories in hindi)

पंचतन्त्र के इस अन्तिम तन्त्र अर्थात् भाग में विशेषरूप से विचार पूर्वक सुपरीक्षित कार्य करने की नीति पर बल दिया है क्योंकि अच्छी तरह विचार किए बिना एवं भलीभांति देखे सुने बिना किसी कार्य को करने वाले व्यक्ति को कार्य में सफलता प्राप्त नहीं होती अपितु जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना………

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