सच्ची डरावनी कहानियां | Horror stories in Hindi

1. एक doll की सच्ची कहानी (Horror stories in Hindi)

नमस्कार दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी Horor story बताने जा रहा हूँ जो बहुत पुरानी होने के साथ साथ बहुत डरावनी भी है और यकीं मानिये यह कहानी पढ़कर आप हैरान हो जायेंगे हो सकता है अपने यह कहानी पहले से ही सुनी या पढ़ी हो इसलिए आप दूसरी कहानी भी पढ़ सकते हैं। यह कहानी है एक doll यानि गुड़िया की जिसका नाम है annabele doll (एनाबेल गुड़िया) तो आईये कहानी शुरू करते हैं।


यह कहानी शुरू होती है सन 1918 से इसी साल एक अमेरिकी राइटर जो बच्चो की कहानियां और कॉमिक्स लिखते थे उन्होंने सबसे पहले इस doll का जीकर अपनी किताब raggedy aan में किया था। इस किताब में उन्होंने अपनी साथ हुई एक सच्ची घटना के बारे में बताया था। वह लिखते हैं कि एक बार वह अपने घर के बैकयार्ड में टहल रहते थे तभी उनको वह doll पड़ी हुई मिली उन्होंने कभी भी पहले ऐसी doll को अपने घर के आस पास नहीं देखा था इसलिए उन्होंने अपने पड़ोसियों से पूछा कि कही ये doll उनकी तो नहीं लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। उन्होंने इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचा और doll को अपनी बेटी को दे दिया। वह doll को देखकर बहुत खुश थी वह उसके साथ हर रोज खेलने लगी।

खेलत खेलते उसको doll के साथ इतना लगाव हो गया कि वह doll को एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ती थी। वह घर में अकेली बैठी उसके साथ ज्यादा समय बिताने लगी और बातें करने लगी उसके पिता को उसकी चिंता होती लेकिन वो बच्ची समझकर उसे नजरअंदाज कर देते। लेकिन जब वह तेरह साल की हुई तब वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गयी। इलाज के लिए उसे वैक्सीन दे गई लेकिन उसका उल्टा प्रभाव हो गया। जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। लेकिन अजीब बात यह थी कि जिस तरह वह doll रहस्य्मयी तरीके से उनके घर में आयी थी ठीक उसी प्रकार वह गायब हो गयी। यह कहानी लोगो में बहुत प्रसिद्ध हो गयी। इसके बाद वह doll कईं सालों तक कहीं भी नजर नहीं आयी। धीरे धीरे लोग इसे भूल गए।

लेकिन 1970 में यह doll हॉबी स्टोर नाम की एक दुकान में नजर आयी। एक दिन किसी महिला को वह डॉल पसन्द आ गयी और उसने यह doll खरीद ली। उस महिला को यह बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि यह डॉल भूतिया है। लेकिन उसने यह doll अपनी बेटी डोना को उसके जन्मदिन पर देने के लिए खरीदा था। डोना उस समय नर्सिंग की पढाई का रही थी और हॉस्टल में अपनों दो सहेलियों के साथ रहती थी। वह इस gift से बहुत खुश थी।

इसके साथ साथ वह हैरान भी थी क्योंकि उसकी doll के साथ खेलने के उम्र भी बीत चुकी थी। लेकिन उसको यह तोफा बहुत पसंद आया। उसने doll को अपने कमरे में सजाकर रख दिया लेकिन उसकी दोनों सहेलियों को यह डॉल बिलकुल भी पसंद नहीं आयी थी। उनमे से एक सहेली जिसका नाम लू था इसको यह डॉल शुरू से ही अजीब लग रही थी और उसने डोना को यह डॉल अपने कमरे में रखने से मन भी किया था। लेकिन डोना ने उसकी बात नहीं मानी। इस doll के कमरे में आने के बाद अजीब हरकते होनी शुरू हो गयी। डोना ने यह नोटिस किया कि यह अपनी जगह बदल लेती थी। डोना ने यह कईं दिनों तक नोटिस किया और अपनी दोनों सहेलियों को इसके बारे में बताया।

डोना की सहेलियों ने उसे सलाह दी कि तुम इस doll को कमरे से निकाल दो क्योंकि यह एक श्रापित doll है। लेकिन डोना ने उनकी बात नहीं मानी क्योंकि वह बहुत प्रेत पर विश्वाश नहीं करती थी। समय बीतता गया और लगभग एक महीने के बाद उन्हें अपने कमरे में एक कागज का टुकड़ा मिला जिस पर बच्चे के लिखावट में ‘help me’ लिखा हुआ था। उन्हें ऐसे टुकड़े कई बार अपने कमरे से मिले। एक दिन जब तीनो सहेलियां अपने कमरे में पहुंची तो उन्हेने देखा कि doll छाती पर और कमर पर लाल रंग के निशान पड़ गए हैं लेकिन क्योंकि वह नर्सिंग कर रही थी तो उन्होंने इसका पता लगाने में ज्यादा समय नहीं लगाया की यह रंग नहीं खून है।

इस दौरान भी डोना की सहेलियों ने उसे बहार निकने को कहा लेकिन डोना ने उनकी बात नहीं मानी क्योंकि डोना को भी इस doll से अजीब तरह का लगाव हो गया था। एक दिन लू घर में अकेली थी और डोना अपनी दूसरी सहेली के साथ कहीं बहार गयी थी। तभी लू को डोना के चीखने की आवाज आयी। वह यह भूल गयी थी कि डोना तो घर में है ही नहीं और जब वह कमरे में गयी तो देखा कि उस कमरे में उस doll के आलावा कोई नहीं है इसके बाद कमरे से लू के चीखने की भी आवाज आयी इत्तेफाक से उस समय डोना और उसकी सहेली लोट कर आ चुकी थी उन्होंने कमरे में जाकर देखा तो लू बेहोश पड़ी थी और शरीर पर गहरे चोट के निशान थे। डोना और उसकी सहेली ने लू को हॉस्पिटल एडमिट करवाया।

दो दिन बाद लू को होश आया और उसने बताया कि उसपर हमला उसकी doll ने किया था। यह बात सुनकर वह हैरान रह गयी। डोना तुरंत ही चर्च जा पहुंची और फादर को उस घटना के बारे में बता दिया। फादर ने उनकी बात सुनकर उनको अपने सीनियर फादर के पास भेज दिया उन्होंने कहा कि इस doll में बुरी आत्मा का साया है और यह बात उनके सँभालने योग्य नहीं है। इसलिए उन्होंने यह खबर पैरानॉर्मल एक्टिविटी एक्सपर्ट पति पत्नी को दे दी।

यह दोनों डोना के हॉस्टल पहुँच गए और doll के साथ एक हफ्ता बिताया। एक हफ्ता बिताने के बाद उन्होंने बताया कि इस doll के अंदर एक शक्तिशाली आत्मा का वास है और ये आत्मा doll से निकल कर इंसानी शरीर में जाना चाहती है इसने डोना का शरीर चुना है। उन्होंने बताया कि इस doll को डोना से जल्दी से जल्दी दूर करना होगा। यह सुनकर डोना बहुत घबरा गयी और doll को उनके साथ ले जाने के लिए हाँ कर दी।

यह पति पत्नी इस doll को अपनी कार में घर ले जाने लगे और रास्ते में कार ने काम करना बंद कर दिया जिससे कार दीवार में टकरा गयी खुशकिस्मती यह रही कि उनको ज्यादा चोट नहीं आयी। कार के बेकाबू होने के पीछे इस doll का ही हाथ था। पति पत्नी ने doll को तंत्र मन्त्र की शक्ति से अपने वश में कर लिया और एक शिशेदार बॉक्स में बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने इस बॉक्स को अपने ही एक ‘accult museum’ में रख दिया। आज भी आप इसे इसी museum में देख सकते है और साफ साफ बॉक्स पर एक वार्निंग भी लिखी हुई है कि बॉक्स को दूर से ही देखे और हाथ न लगाएं।
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2. कॉल सेंटर में काम करने वाली भूत की कहानी (Horror Stories In Hindi)

दोस्तों दूसरी कहानी भी बहुत डरावनी है और यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जो मुर्दा होकर एक call center में काम करती थी। तो आईये कहानी जानते हैं। यह बात एक गुड़गांव इलाके की जो अब बदल कर गुरुग्राम हो चूका है। अस्सी के दशक में गुड़गाव बहुत ही वीरान और सुनसान हुआ करता था बहुत ही कम लोग वहां रहा करते थे।

कोई भी उस इलाके से जाना पसंद नहीं करता था और रात को तो बिलकुल नहीं। लेकिन एक समय ऐसा आया जब दिल्ली के जनसँख्या बढ़ने लगी और नए नए बिज़नेस के मोके मिलने लगे तो दिल्ली के आसपास के इलाके जैसे नोएडा और गुड़गांव को एक ऐसे सिटी में बनाने का ख्याल जनता के मन में आया जहाँ हर एक मल्टीनेशन company के office और हर एक सुविधा उपलब्ध हो। धीरे धीरे गुड़गांव को बदलने का काम शुरू हुआ। लेकिन उसी से साथ वहां अजीब अजीब घटाएँ भी होने लगी। कईं बार तो खुदाई करते समय कंकाल निकलते जिनसे लोग बहुत डर जाते।

वहां के लोगों की किस्मत पलटने लगी जिनके पास अपनी जमीने थी वह बहुत अमीर होने लगे क्योंकि उस समय जमीन के भाव आसमान छूने लगे थे। समय बीतता चला गया लेकिन गुड़गांव में अजीब घटनाएं थम नहीं रही थी। कारणों का पता लगाया गया और पता चला कि जब भारत में मुग़ल रहते थे तो उस समय इस इलाके में बहुत डाकू रहते थे जो गुड़गांव से जाते किसी भी मुसाफिर को लूट कर उसे मार देते थे और वहीँ दफना देते थे। जो खुदाई में कंकाल निकलते थे वे उन्ही मुसाफिरों के ही थे। लेकिन समय बीतता चला गया और गुड़गावं गुरुग्राम में बदल गया।

अब यह इलाका हर एक कंपनी के लिए बहुत अच्छा था हेर एक company के office आप इस जगह देख सकते हैं। इसी दौरान एक कॉल सेण्टर जिसमे बहुत से लोग काम करते थे उसका भी निर्माण हुआ। उस call center में लड़की काम करती थी जिसका नाम था रोज़ जो अपने काम को लेकर बहुत ही सतर्क थी और बहुत ही अच्छी तरह से काम भी कर रही थी। कईं बार वह लगातार employ of the month का ख़िताब भी जीतती रही।

जिसके कारण वह अपने सीनियर अफसरों की नजरों में बहुत लायक थी। उसकी टीम लीडर  उसके काम पर लगातार नजर बनाए रखती थी और देखती थी की किस तरह वह call center में ग्राहकों के प्रश्नो के उत्तर देती है। वह उसके काम से बहुत इम्प्रेस थी। लेकिन एक दिन उस लड़की के पास एक कॉल आया। आमतौर पर call center में कॉल लगभग पांच से छः मिनट तक ही लम्बी चलती थी लेकिन उस दिन कॉल लगभग 1 घंटे तक चली बात करते समय वह बहुत परेशान नजर आ रही थी।

उसकी टीम लीडर ने सोचा मसला काफी गंभीर होगा इसलिए उसने इस और ध्यान नहीं दिया। लेकिन बात खत्म होने पर उसका रवैया बिलकुल बदल गया वह परेशान हो गयी और अपना बेग उठाकर वहां से चली गयी उसकी टीम लीडर  को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह चली क्यों गयी।

जानने के लिए उसने उसके आसपास के इम्प्लॉयेस से पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि उसने सिर्फ इतना कहा कि मैं घर जा रही हूँ और वो चली गयी। टीम लीडर ने सोचा कि मुझे उस नम्बर की जाचं करनी चाहिए जिससे कॉल आयी थी लेकिन जब उसने यह देखा तो उसे बहुत बड़ा झटका लगा कि वह फोन पर बात कर रही है लेकिन सामने से कोई कॉल नहीं आया। उसने इस बात को ज्यादा गंभीर नहीं लिया।

अगले दिन जब रोज़ को company आना था तो वह वहां नहीं पहुंची टीम लीडर को चिंता होने लगी क्योंकि पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था। उसने सोचा कि शायद उसी कॉल की परेशानी को वजह से वह आज नहीं आयी होगी। दिन बिता, दूसरे दिन भी रोज़ सेण्टर नहीं आयी टीम लीडर ने उसे कॉल किया लेकिन उसका फोन बंद आ रहा था। मेल किया, मैसेज किया। लेकिन रोज़ से सम्पर्क नहीं हो रहा था।

टीम लीडर ने नाईट शिफ्ट में रोज़ को घर छोड़ने वाली गाड़ी के ड्राइवर से पूछताछ की और रोज़ का पता निकला। company के किसी employ को उस पते पर भेजा गया। जब उस व्यक्ति ने उस पते के घर मालिक से बात की तो पता चला कि यहाँ इस नाम की कोई लड़की नहीं रहती। employ ने बोला लेकिन ड्राइवर उसको यहीं छोड़कर जाता था। इसपर मकान मालिक कहता है। शायद वह यहाँ उतरती हो लेकिन उसका घर आसपास ही हो। पता करने पर वहां रोज़ का कोच पता नहीं चला। employ ने यह खबर अपने बड़े अफसरों को बताई।

उन्होंने सोचा कि शायद किसी प्रिवेसी के कारन रोज़ ने अपना पता सही न दिया हो। लेकिन कुछ दिन बाद रोज़ का पता कपनी द्वारा निकल लिया गया। दोबारा उस पते पर company ने अपने employ को भेजा। company द्वारा भेजा गया व्यक्ति उसके घर पहुंचा और रोज़ के मन बाप से मिला और रोज़ के बारे में पूछताछ की और कहा वह काईन दिनों से office नहीं आ रही है। माँ बाप ने कहा कब से नहीं आ रही है। employ ने कहा लगभग 15 दिन हो गए हैं। कितने दिनों से काम कर रही है माँ बाप ने पूछा employ बोला साल से ज्यादा हो गया।

लेकिन उसके बाद उसके माँ बाप ने जो जवाब दिया उससे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने कहा ऐसा नहीं हो सकता रोज़ को मरे 8 साल हो चुके हैं। employ को लगा कि शयद गलत जगह आ गए है लेकिन employ ने माँ बाप को रोज़ की फोटो दिखाई। माँ बाप ने कहा हां यही है। यह सुनने के बाद employ को लगा माँ बाप झुठ नहीं बोल सकते। यह बात employ ने अपने सीनियर को बताई उन्होंने अच्छी तरह से यह जानने के लिए उनसे फोन पर बात की और पता चला कि यह सच है।

यह बात पुरे office में फ़ैल गई। जो employ रोज़ साथ में काम करते थे उनमे से एक की मौत हार्टअटैक से हो जाती है और कुछ की दिमागी हालत खराब हो जाती है। इतना ही नहीं इससे पहले वहां कईं हैरान करने वाली घटनाएं घटी। एक बार बेसमेंट में बैठे गार्ड को कुर्सी से गिरा दिया जाता है वह लोगों को बताता है लेकिन उसकी बातों पर कोई यकीं नहीं करता।

एक बार उसी office में बाथरूम से किसी लड़की के चिल्लाने की आवाज आती है और भी कईं अजीब घटनायें होती हैं। बाद में पता चलता है कि जहाँ वह office बना है वहां लगभग सौ साल पुराना श्मशान घाट हुआ करता था और खुदाई के दौरान कईं कंकाल भी निकले थे इसी कारण यह सभी घटनाएं होती थी। लेकिन रोज़ वाली घटना ने सभी को हिला कर रख दिया। लेकिन company ने यह बात फ़ैलने नहीं दी जिससे उनके के कारोबार बार प्रभाव न पड़े।

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3. रहस्यमयी ट्रेन (Horror Stories In Hindi)

तीसरी कहानी एक ट्रेन की कहानी है जो एक सुंरंग में एंटर हुई पर बाहर नहीं निकली और आज तक उस ट्रेन के बारे में किसी को कोई भी जानकारी नहीं है। तो आईये कहानी जानते हैं। कहानी शुरू होती है सन 1911 में इटली से, इटली की एक कंपनी जिसका नाम था जेनिटी उसने एक ट्रेन का निर्माण किया और ट्रेन के ट्रायल के लिए कम्पनी ने 100 लोगों की लिस्ट बनाई जिन्हे फ्री में कुछ दुरी तक ट्रेवल करवाना था और उनके खाने पिने की भी व्यवस्था करनी थी।

तो इसी अनुसार 100 लोगों की लिस्ट बनाई और 6 लोग ट्रेन का स्टाफ था यानि कुल मिलाकर उसमे 106 लोग सवार थे। तीन बोगी इस ट्रेन में लगी थी। इस ट्रेन में 1911 की टेक्नोलॉजी के हिसाब से आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया था। ट्रेन के रास्ते में एक लुम्बार्डी टनल नाम की एक सुरंग आनी थी। उस समय बहुत कम सुरंगे होती थी और बहुत छोटी होती थी लेकिन इस सुरंग की लम्बाई लगभग आधा मील थी चूँकि ट्रेन का ट्रायल था इसलिए यात्रियों की खातिरदारी भी बहुत अच्छे से हो रही थी।

ट्रेन चल पड़ी, ट्रेन को जाते हुए बहुत से लोगों ने देखा लेकिन जब वह ट्रेन उस सुरंग में दाखिल हुई। लोगों ने सुरंग से निकलने का इंतजार किया लेकिन बहुत समय बीत गया ट्रेन सुरंग से बाहर नही आयी यह अपने आप में ही बहुत ही हैरान करने वाली घटना थी। लेकिन जब यह खबर फैली तो हड़कंप मच गया। खबरें छपीं और पूछताछ हुई स्टेशनों पर सिंगलों पर और जिन लोगों ने ट्रेन को चलते हुए देखा उनसे पूछताछ हुई।

पूछताछ से निष्कर्ष निकला की यह ट्रेन इस टनल में ही गुम हुई है टनल में छानबीन हुई लेकिन ट्रेन का कुछ अता पता नहीं चल रहा था।तभी दो लोगों ने यह दावा किया कि वह उस ट्रेन में सवार थे और उन्होंने ट्रेन से छलांग लगा दी क्यूंकि जब ट्रेन सुरंग में दाखिल होने लगी तो एक जोर की आवाज के साथ सफेद धुआं हुआ जिससे वह घबरा गए और चलती ट्रेन से कूद गए। लेकिन उनकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी जिसकारण उसकी बातों पर यकीं करना मुश्किल हो गया।

लेकिन जब उनका नाम पैसेंजरों की लिस्ट में पाया गया तो सब हैरान हो गए। कुछ समय बाद मैक्सिको की एक डॉक्टर ने दावा किया कि उसके पास कुल 104 मानसिक रूप से बीमार लोग आये थे और अटपटी बातें कर रहे थे। तो लोग यह कड़ियाँ भी जोड़ने लगें कि ये शायद वही लोग न हो जो ट्रेन के साथ गायब हुए थे। क्योंकि जो दो लोग मिले थे उन्हें मिलाकर 106 लोग होते हैं और ट्रेन में कुल 106 लोग थे। यहाँ तक तो ठीक है लेकिन बहुत से लोगों ने दावा किया ज़ेनिटी कंपनी की हूबहू इसी ट्रेन को इसी मोडल को अलग अलग समय में रशिया, जर्मनी, रोमानिया और मैक्सिको में देखा गया।

लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात कि जो ट्रेन 1911 में चली थी वही हूबहू ट्रेन 1840 में मैक्सिको में देखि गयी थी। लेकिन सवाल ये था कि जो ट्रेन 1911 में चली हो वही ट्रेन 1840 यानि 71 साल पहले कैसे देखि गयी और जो वो लोग मिले थे जिनकी मानसिक हालत खराब थी वह कहाँ गए यह सबसे बड़े सवाल थे लेकिन जब बहुत प्रयत्नों के बाद भी ट्रेन का पता नहीं चल पाया तो यह मान लिए गया कि यह ट्रेन सुरंग में टाइम ट्रेवल का शिकार हुई है। आज भी इस ट्रेन के बारे में कोई नहीं जनता कि आखिर यह ट्रेन गयी कहाँ। यह दुनिया की सबसे बड़ी mysteries में से एक है। 

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