The Best 4 Short Motivational Stories In Hindi With Moral | जिंदगी बदलने वाली प्रेरक कहानियां

short motivational stories in hindi with moral
रस्सी से बंधे हाथी
यह कहानी एक ऐसी कहानी है जिसे अगर आप ध्यान से समझने के साथ साथ अपने जीवन में अपनाते हैं तो आप अपने कार्य के प्रति बहुत motivat हो जाओगे और अपने कार्य में सफलता जरूर हासिल करोगे। तो इए जानते हैं इस short motivational story के बारे में ।
 

एक समय की बात है एक व्यक्ति अपने किसी काम से बाहर जा रहा था। रास्ते में उसे एक हाथियों का शिविर (elephant camp)  दिखाई दिया। शिविर को वह खड़ा होकर बड़ी ध्यानपूर्वक देखने लगा और वह एक दृश्य को देखकर बहुत हैरान हो गया। 


बाकी लोगों को वह दृश्य बहुत ही आम सा लगता था लेकिन वह व्यक्ति उस दृश्य से बहुत प्रभावित हुआ।  दृश्य था कि उसने देखा कि बड़े बड़े, हट्टे कट्टे, जानदार और शक्तिशाली हाथियों को सिर्फ एक छोटी सी रस्सी के माध्यम से उनके एक पैर में डालकर बांधा हुआ था ।
 
परंतु ऐसे हाथियों को तो बड़े बड़े पिंजरों और लोहे की जंजीरों के माध्यम से भी बस में ना किया जा सके। तो ये हाथी सिर्फ एक पतली सी रस्सी के माध्यम से कैसे वश में थे।
 
उस व्यक्ति के मन में यह जानने की प्रबल जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि यह हाथी कैसे छोटी सी रस्सी के माध्यम से वश में हैं। उस व्यक्ति ने शिविर में जाने और हाथियों के ट्रेनर से इस सवाल का जवाब पूछने के सलाह बनाई। वह शिविर में चला गया और ट्रेनर से बड़ी उत्सुकता पूर्वक प्रश्न करने लगा। कि आखिर इन हाथियों को छोटी सी रस्सी से बांध कर कैसे वश में किया गया है? 
 
ट्रेनर ने हंसकर जवाब दिया-“जब हाथी बहुत छोटे होते हैं या उनके जन्म के कुछ समय बाद, उन्हें एक रस्सी से बांध दिया जाता है।वह ज्यादा मजबूत नहीं होती । जब छोटे हाथी के बच्चे बहुत कोशिश करने  के बाद भी उसे तोड़ नहीं पाते और उसे तोड़ने के लिए बहुत मेहनत करते है। तो बड़े होने के साथ साथ उनके दिमाग में यह विचार घर कर जाता है कि वह उस रस्सी को तोड़ नहीं सकते।”
 
यही कारण है कि रस्सी ज्यादा मजबूत न होने के कारण भी सिर्फ हाथियों को उनके इस विचार के कारण बांधे रखती है कि वह उसे तोड़ नहीं सकते। जैसा वह बचपन में अपने मन में विचार बैठा लेते हैं वैसा ही उनके साथ बड़ा होने पर होता है। इतने ताकतवर होने के बाद भी वह नकारात्मक विचार के कारण कमजोर सी रस्सी से बंधे रहते हैं।

शिक्षा  (Moral Of The Story)

हमेशा अपने लक्ष्य को पाने की कोशिश में इस उम्मीद से जुटे रहो कि एक ना एक दिन आपको सफलता जरूर मिलेगी। आपके और आपकी सफलता की बीच बहुत सी असफलताएं भी आयेंगी। लेकिन अगर पने हाथियों की तरह यह सोच लिया कि यह कभी नहीं हो सकता तो आप असफलता की कमजोर सी रस्सी से भी बहुत मजबूती से बंधे रहोगे। 

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दूसरों के गुणों को अपनाएं (short motivational stories in hindi with moral)

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दूसरों के गुणों को अपनाएं

एक दिन श्रील चेतन्य महाप्रभु पुरी (उड़ीसा) के जगन्नाथ मंदिर में ‘गुरूड़ स्तंभ’ के सहारे खड़े होकर दर्शन कर रहे थे। एक स्त्री वहां श्रद्धालु भक्तों की भीड़ को चीरती हुई देव-दर्शन हेतु उसी स्तंभ पर चढ़ गई और अपना एक पांव महाप्रभुजी के दाएं कंधे पर रखकर दर्शन करने में लीन हो गई।

 

यह दृशय देखकर महाप्रभु का एक भक्त घबड़ाकर धीमे स्वर में बोला, हाय, सर्वनाश हो गया! जो प्रभु स्त्री के नाम से दूर भागते हैं, उन्हीं को आज एक स्त्री का पाँव पेश हो गया! न जाने आज ये क्या कर डालेंगे।

 

वह उस स्त्री को नीचे उतारने के लिए आगे बढ़ा ही था कि उन्होंने सहज भावपूर्ण शब्दों में उससे कहा -‘अरे नहीं, इसको भी जी भरकर जगन्नाथ जी के दर्शन करने दो, इस देवी के तन-मन-प्राण में कृष्ण समा गए हैं, तभी यह इतनी तन्मयी हो गई कि इसको न तो अपनी देह और मेरी देह का ज्ञान रहा…..अहा! ठसकी तन्मयता तो धन्य है…इसकी कृपा से मुझे भी ऐसा व्याकुल प्रेम हो जाए।’

 

शिक्षा (Moral Of The Story)

काम करते समय दूसरों की गलतियों की बजाय अच्छाइयां ढूँढ़ना अपनी आदत में लें, जिससे हमारे का की गुणवत्ता बढ़े और समय की बचत हो। साथ में यह आदत हमारे शिष्ट-व्यवहार को दर्शाएगी।

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रहस्य सफलता का (motivational stories in hindi for success)

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रहस्य सफलता का

एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है?

सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलोवो मिले फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहाऔर जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया

 

लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा, लेकिन सुकरात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हॉफते-हॉफते तेजी से सांस लेना

 

सुकरात ने पूछा,” जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे?”

लड़के ने उत्तर दिया,”सांस लेना” सुकरात ने कहा,” यही सफलता का रहस्य है जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना चाहते थे तो वो तुम्हे मिल जाएगी” इसके आलावा और कोई रहस्य नहीं है

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1009 असफलताएं (real motivational stories in hindi)

मित्रों यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने पूरी दुनिया के सामने यह साबित कर दिया कि अगर आप अपनी असफलताओं से हार ना माने और सफलता पाने का प्रयास करते रहें तो आपकी जिंदगी में बहुत जल्द ही वह दिन आएगा जिस दिन आप एक बड़ी सफलता प्राप्त करने में कामयाब होंगे।
 
 तो आइए उस व्यक्ति की short motivational story के बारे में moral सहित जान लेते हैं।

दोस्तो उस व्यक्ति का नाम तो मैं आपको कहानी के आखिर में बताऊंगा क्योंकि उसका नाम जानने के बाद आप बहुत चोंक जाएंगे।

बचपन में सिर्फ पांच साल की आयु में ही उनके पिता का देहांत हो गया। जिस कारण उनके घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई। जैसे कैसे करके उन्होंने सोलह साल की उम्र तक पढ़ाई की, परंतु पैसे की कमी होने के कारण उनको अपना स्कूल छोड़ना पड़ा।
 
 तब वह कुछ पैसे कमाने के लिए नौकरी की तलाश करने लगे परन्तु हर जगह उनको असफलता ही हाथ लगी। 18 साल की आयु में उन्होंने शादी करने का निश्चय किया। इसके बाद इन्होंने 4 साल तक कंडेक्टर की नौकरी की। इसके बाद ये आर्मी में चले गए लेकिन दुर्भाग्य वश इनको आर्मी से निकाल दिया गया।

इसके बाद इन्होंने वकालत करने का निश्चय किया। लेकिन ये वहां भी असफल हो गए। फिर इन्होंने बीमा का काम करने का निश्चय किया लेकिन ये वहां भी फेल हो गए ।

19 साल की उम्र में ये पिता बन गए लेकिन 1 साल  बाद इनकी पत्नी इनको छोड़ कर चली गई और अपने बच्चे को भी साथ ले गई। अब यह व्यक्ति बहुत अकेला हो गया था।  इन्होंने एक होटल में बावर्ची का काम शुरू कर दिया इनको बहुत ही अच्छे से बावर्ची का काम आता था। 
 
लेकिन 65 साल की उम्र तक इनके हाथ 1009 असफलताएं लगी थी सफलता तो जैसे इनसे रूठ कर कहीं बैठ गई थी। ये अपने जीवन में इतनी सारी असफलताएं पाकर बहुत निराश थे।
 
एक बार ये पेड़ के नीचे बैठ कर अपनी जिंदगी के कुछ किस्से लिख रहे थे। तभी इन्हे एहसास हुआ कि अभी तो कुछ करना बाकी है। इस बार इनके पास बावर्ची का बहुत अच्छा हुनर था। इन्हे चिकन बहुत अच्छे तरीके से फ्राई करना आता था।

उस समय इनके पास 100 डॉलर थे जिसमे से इन्होंने 42 डॉलर का कुछ चिकन और मसाले खरीदे। चिकन को फ्राई करने के बाद इन्होंने घर घर जाकर बेचना शुरू कर दिया। 
 
लोगो द्वारा इनके चिकन को बहुत ज्यादा पसंद करने लगे। 65 साल की उम्र में गली गली चिकन बेचना बहुत हिम्मत की बात है। इस के बाद तो इनकी जिंदगी ने एक अलग ही मोड़ के लिया।

देखते ही देखते इनका चिकन फ्राई बहुत ज्यादा लोकप्रिय होने लगा लोग इनके की चिकन फ्राई को खरीदते थे। कुछ ही समय में इन्होंने अपने चिकन फ्राई की कंपनी खोल दी।
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“कर्नल” हरलैंड डेविड सैंडर्स
 88 साल की उम्र में आखिरकार यह अरबपति बन गए जिनका नाम है “कर्नल” हरलैंड डेविड सैंडर्स। ये वही हैं जिन्होंने KFC कंपनी शुरू की। KFC की फूल फॉर्म केंटकी फ्राइड चिकन है। इनकी ब्रांच दुनिया के हर एक देश में मौजूद हैं। 

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KFC
अपने भी कभी ना कभी KFC  का फ्राई चिकन तो खाया होगा। तो देखा अपने कि कैसे एक व्यक्ति ने अपने जीवन में 1009 असफलताओं। का सामना किया और अपनी जिंदगी के आखिरी समय में ऐसी सफलता हासिल की जो दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी है।

शिक्षा (Moral Of Tha Story)

कहानी से यह सीखने की मिलता है कि कभी भी अपनी असफलताओं से हर नहीं माननी चाहिए। सफलता के लिए हमेशा कोशिश करते रहें। एक ना एक दिन आपको भी सफलता अवश्य मिलेगी।

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