स्वामी विवेकानंद जी के शिक्षा पर विचार | Swami Vivekananda Quotes on Education In Hindi

स्वामी विवेका नन्द जी के गुरु का नाम रामकृष्ण परमहँस था। जैसा की आप जानते है कि स्वामी विवेकानद को उनके भाषण के कारण अधिक जाना जाता है। स्वामी विवेकानंद शास्त्र वेद के बहुत बड़े विद्वान थे। वह शास्त्र का ज्ञान न ही भारत अपितु पुरे संसार को देना चाहते थे। तो आईये जानते हैं स्वामी विवेकानंद जी के शिक्षा पर विचारों को जो किसी भी व्यक्ति को सफल बना सकती हैं।  

उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत।” स्वामी विवेकानंद

हमे ऐसी शिक्षा चाहिए, जिससे चरित्र बने, मानसिक विकास हो, बुद्धि का विकास हो और मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा हो सके।”  स्वामी विवेकानंद
जिस अभ्यास से मनुष्य की इच्छाशक्ति, और प्रकाश संयमित होकर फलदाई बने उसी का नाम है शिक्षा।”  स्वामी विवेकानंद

हम सर्वत्र, सभी क्षेत्रों में मनुष्य बनाने वाली शिक्षा चाहते हैं ।”  स्वामी विवेकानंद
समस्त ज्ञान चाहे वो लोकिक हो या आध्यात्मिक, मनुष्य के मन में है परन्तु प्रकाशित ना होकर वह ढका रहता है । अध्ययन से वह धीरे धीरे उजागर होता है।”  स्वामी विवेकानंद

Swami Vivekananda Quotes on Education
Swami Vivekananda Quotes
विद्यार्थी की आवश्यकता के अनुसार शिक्षा में परिवर्तन होना चाहिए ।”  स्वामी विवेकानंद


Swami Vivekananda Quotes on Education
Swami Vivekananda Quotes
ज्ञान की प्राप्ति के लिए केवल एक ही मार्ग है और वह है ‘एकाग्रता’ ।”  स्वामी विवेकानंद
एकाग्रता की शक्ति ही ज्ञान के खजाने की एकमात्र कुंजी है ”  स्वामी विवेकानंद
ज्ञान का दान मुक्तहस्ट होकर, बिना कोई दाम लिए करना चाहिए ।”  स्वामी विवेकानंद
गुरु के प्रति विश्वास, नम्रता, विनय, और श्रद्धा के बिना हममें धर्म का भाव पनप नहीं सकता ।”  स्वामी विवेकानंद
अधिकांश महापुरुषों को सुख की अपेक्षा दुख और संपत्ति की अपेक्षा दरिद्रता ने अधिक शिक्षा दी है।”  स्वामी विवेकानंद

हम स्वयं अपने भाग्य का निर्माण करते हैं।”  स्वामी विवेकानंद
जब मन को एकाग्र करके अपने ऊपर लगाया जाता है तो हमारे भीतर के सभी हमारे नोकर बन जाते हैं।”  स्वामी विवेकानंद

मनुष्य जैसा सोचता है वैसा बन जाता है ।”  स्वामी विवेकानंद

Swami Vivekananda Quotes on Education
Swami Vivekananda Quotes
आत्मविश्वास मानवता का एक शक्तिशाली अंग है।”  स्वामी विवेकानंद
शिक्षक अर्थात गुरु  के व्यक्तिगत जीवन के बिना कोई शिक्षा नहीं हो सकती।” ~ स्वामी विवेकानंद
शिष्य के लिए आवश्यकता है शुद्धता, ज्ञान की सच्ची लगन के साथ परिश्रम की।”  स्वामी विवेकानंद

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